शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे: 103 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक, मुआवजा मिलने तक नहीं होगी जमीन की रजिस्ट्री…
उत्तर प्रदेश सरकार ने शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सुचारू बनाने हेतु महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य भूमि अध्याप्ति, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन नीति (एसएलओ) विभाग ने आदेश जारी कर परियोजना मार्ग में आने वाले 103 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है।
इस रोक के बाद इन गांवों में किसी भी प्रकार का बैनामा या संपत्ति का लेन-देन नहीं हो सकेगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि अधिग्रहण के दौरान जमीन की कीमतों में कृत्रिम वृद्धि और सट्टेबाजी को रोका जा सके।
प्रभावित क्षेत्र
एसएलओ विभाग ने नजीबाबाद, धामपुर और बिजनौर के उप-पंजीयक कार्यालयों को गांवों की सूची भेजी है।
- बिजनौर जिले के 32 गांव
- नजीबाबाद तहसील के 16 गांव
- धामपुर तहसील के 55 गांव
कुल मिलाकर 103 गांव इस रोक के दायरे में आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल पहली सूची है, आगे और गांवों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।
रोक का उद्देश्य
- भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना
- सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ से बचाव
- भविष्य में कानूनी विवादों की संभावना कम करना
- जमीन की कीमतों में असामान्य वृद्धि और सट्टेबाजी रोकना
कब हटेगी रोक?
यह रोक अस्थायी है। भूमि अधिग्रहण पूरा होने और प्रभावित किसानों/भू-स्वामियों को उचित मुआवजा मिलने के बाद ही इसे हटाया जाएगा।
परियोजना का महत्व
शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी हिस्से से जोड़ेगा। इसका मार्ग मंडावर-चंदक क्षेत्र और विशेष रूप से धामपुर तहसील से होकर गुजरेगा।
- क्षेत्र में आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी
- परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा
- लोगों का आवागमन सुगम बनेगा
स्थानीय प्रभाव
हालांकि यह निर्णय दीर्घकालिक विकास के लिए है, लेकिन फिलहाल स्थानीय निवासियों और संपत्ति डीलरों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक से कई







