पी.एम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन …

पीएम मोदी का राष्ट्र संबोधन: नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 18 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करते हुए महिलाओं के अधिकारों और नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की आधी आबादी यानी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए यह संशोधन एक ऐतिहासिक कदम था, लेकिन विपक्ष ने इसे रोककर देश की नारी शक्ति की उड़ान को बाधित किया।

पीएम मोदी का संदेश महिलाओं के नाम

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे विशेष रूप से देश की बहनों और बेटियों से संवाद करने आए हैं। उन्होंने कहा:

  • “नारी के दुख में मैं भी दुखी हूं।”
  • “21वीं सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही है और सच्चाई को भलीभांति जान चुकी है।”

मोदी ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने वाला यह संशोधन 40 वर्षों से लंबित था और इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने की योजना थी।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: एक ऐतिहासिक पहल

प्रधानमंत्री ने इस अधिनियम को “भव्य यज्ञ” और “पवित्र उत्सव” बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम:

  • महिलाओं को नए अवसर प्रदान करने के लिए था।
  • उनके मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए था।
  • देश की 50% आबादी को अधिकार देने के लिए शुद्ध इरादे और ईमानदारी से उठाया गया था।

विपक्ष पर तीखा हमला

पीएम मोदी ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ दलों ने देशहित से ऊपर दलहित को रखा। उन्होंने कहा:

  • “हमारे लिए देशहित सर्वोपरि है। लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दलहित सब कुछ हो जाता है, तो नारी शक्ति और देशहित को इसका खामियाजा उठाना पड़ता है।”
  • उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि महिला अधिकार छीनकर विपक्ष ताली बजा रहा था।

प्रधानमंत्री का यह संबोधन महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण पर केंद्रित था। उन्होंने इसे भारत की नारी शक्ति को नई उड़ान देने वाला कदम बताया और विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने देशहित से ऊपर दलहित को प्राथमिकता दी।

यह संबोधन न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी, क्योंकि इसमें महिलाओं को केंद्र में रखकर उनके अधिकारों और अवसरों की बात की गई।