“भारतीय रुपया 90.14 पर धड़ाम! क्या महंगाई और आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा भारत?”
भारतीय रुपये ने बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.14 के सर्वकालिक निचले स्तर को छू लिया। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी संभावित चुनौतियों की जोरदार चेतावनी है। लगातार गिरता रुपया अब निवेशकों, आयातकों और आम जनता सभी के लिए चिंता का विषय बन गया है।
📉 रुपये की ऐतिहासिक गिरावट
- बुधवार की शुरुआत में रुपया 89.97 पर था।
- कुछ ही मिनटों में यह 90 के पार चला गया।
- दोपहर तक यह 90.14 के रिकॉर्ड लो-लेवल पर ट्रेड करता दिखा।
- डीलरों का कहना है कि बाजार में बेचैनी बढ़ी हुई है और गिरावट कहां रुकेगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि RBI ने डॉलर बेचकर करंसी को संभालने की कोशिश की होगी, लेकिन दबाव इतना ज्यादा है कि असर सीमित रहा।
🌍 2025: भारतीय करेंसी के लिए भारी साल
- साल 2025 की शुरुआत से ही रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5% से ज्यादा टूट चुका है।
- भारत–अमेरिका ट्रेड डील में देरी, विदेशी बाजारों में बिकवाली और घरेलू अनिश्चितताओं ने रुपये को कमजोर किया है।
- विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि रुपया 90 की सीमा तोड़ सकता है, लेकिन इतनी तेज गिरावट की उम्मीद किसी ने नहीं की थी।
⚠️ क्या अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी?
किसी भी देश की करेंसी का तेजी से गिरना उसकी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं होता। भारत जैसे देश, जहां 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात होता है, वहां रुपये की गिरावट महंगाई को तेज करने का बड़ा कारण बन सकती है।
- तेल आयात महंगा होगा → पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी।
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ेगी।
- उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें ऊपर जाएंगी।
- महंगाई का दबाव आम जनता पर और ज्यादा बढ़ेगा।
भारतीय रुपये का 90.14 तक गिरना सिर्फ करेंसी मार्केट की हलचल नहीं है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई, आयात लागत और निवेशकों की चिंता का संकेत है। अगर यह गिरावट लंबे समय तक जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में भारत को तेज महंगाई और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
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