संविधान दिवस पर पीएम मोदी का पत्र लिखकर विशेष संदेश: पहली बार वोटर बने युवाओं को मनाना चाहिए जश्न

📅 नई दिल्ली, 26 नवंबर – भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे अहम तारीखों में से एक, संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के नाम एक भावनात्मक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने संविधान की महानता, मौलिक कर्तव्यों के महत्व और पहली बार वोटर बने युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया।

✉️ पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने संविधान दिवस पर देशभर के नागरिकों को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने साझा किया कि:

  • संविधान की महानता – यह दस्तावेज़ भारत के विकास का मार्गदर्शक है।
  • मौलिक कर्तव्यों का महत्व – नागरिकों को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए ताकि अधिकार स्वतः सुनिश्चित हों।
  • पहली बार वोटर बने युवाओं का उत्सव – लोकतंत्र में उनकी भागीदारी को सम्मानित करना चाहिए।

संविधान की वजह से मिला अवसर

पीएम मोदी ने लिखा कि 26 नवंबर हर भारतीय के लिए गौरवशाली दिन है क्योंकि इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने भारत का संविधान अंगीकार किया था।

  • 2015 में एनडीए सरकार ने इस दिन को संविधान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
  • उन्होंने कहा कि संविधान की शक्ति ने उन्हें, एक साधारण परिवार से निकले व्यक्ति को, प्रधानमंत्री बनने का अवसर दिया।
  • संसद भवन में प्रवेश करते समय 2014 में उन्होंने लोकतंत्र के मंदिर को नमन किया और 2019 में चुनाव परिणाम के बाद संविधान को सिर माथे लगाया।

📜 मौलिक कर्तव्यों की याद दिलाई

प्रधानमंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 51A का उल्लेख करते हुए कहा कि मौलिक कर्तव्य सामाजिक और आर्थिक प्रगति का मार्ग दिखाते हैं।

  • महात्मा गांधी के विचारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कर्तव्यों का पालन करने से अधिकार स्वतः प्राप्त होते हैं।
  • हर नागरिक को राष्ट्र और समाज के प्रति कृतज्ञता का भाव रखते हुए अपने कार्य पूरी निष्ठा से करने चाहिए।
  • उन्होंने कहा कि जब हम कर्तव्य की भावना से काम करेंगे तो देश की प्रगति कई गुना बढ़ जाएगी।

🗳️ पहली बार वोटर बने युवाओं के लिए संदेश

पीएम मोदी ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि मतदान का अधिकार संविधान ने दिया है और यह हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह मतदान का अवसर कभी न छोड़े।

  • उन्होंने सुझाव दिया कि 26 नवंबर को स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सम्मान समारोह आयोजित किए जाएं।
  • 18 वर्ष के हो रहे युवाओं को यह महसूस कराया जाए कि वे अब केवल छात्र नहीं, बल्कि नीति निर्माण की प्रक्रिया के सक्रिय सहभागी हैं।
  • उन्होंने कहा कि हर वर्ष संविधान दिवस पर पहली बार वोटर बने युवाओं का सम्मान करने की परंपरा विकसित होनी चाहिए।
  • इससे युवाओं में जिम्मेदारी और गर्व का भाव जागेगा और वे जीवनभर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहेंगे।