पंजाब में पराली जलाने का सिलसिला जारी , बिगड़ी हवा की गुणवत्ता, कई शहरों में AQI खतरनाक स्तर पर
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और राज्य सरकार की कड़ी निगरानी के बावजूद पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। खेतों में जल रही पराली का धुआं राज्य के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण को गंभीर स्तर तक पहुंचा रहा है।
🚨 वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बेहद खराब
सोमवार को जालंधर, खन्ना और पटियाला में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 से ऊपर दर्ज किया गया, जो “बेहद खराब” श्रेणी में आता है। वहीं मंडी गोबिंदगढ़ में AQI 409 तक पहुंच गया, जो “गंभीर” श्रेणी में माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर का प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए अत्यंत खतरनाक है। पराली का धुआं हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे महीन कणों की मात्रा बढ़ा रहा है, जिससे आंखों में जलन, खांसी, सांस लेने में कठिनाई और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। डॉक्टरों ने लोगों को मास्क पहनने की सलाह दी है।
🔥 पराली जलाने के मामले बढ़े, आंकड़ा 2,518 तक पहुंचा
सोमवार को राज्य में पराली जलाने के 256 नए मामले सामने आए, जिससे इस सीजन में कुल मामले 2,518 हो गए हैं। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40% कम है। पिछले साल 15 सितंबर से 3 नवंबर तक 4,132 मामले दर्ज किए गए थे।
संगरूर जिले में पिछले छह दिनों से सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं। सोमवार को यहां 61 नए मामले दर्ज हुए। अब तक तरनतारन में 471 और संगरूर में 467 मामले दर्ज किए गए हैं। कृषि विभाग के अनुसार, राज्य में अभी भी लगभग 15% क्षेत्र में धान की कटाई बाकी है।
⚖️ सरकार की सख्ती, फिर भी लापरवाही बरकरार
राज्य सरकार ने पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए आठ हजार कर्मचारियों और अधिकारियों को निगरानी के लिए तैनात किया है। अब तक 590 एफआईआर दर्ज की गई हैं और किसानों पर कुल 47.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 22.05 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है। इसके अलावा, 841 किसानों की जमीनों पर रेड एंट्री की गई है।








