बिजनौर में पूर्व सीएम कमलनाथ की जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप, फर्जी वसीयत और राजस्व रिकॉर्ड की जांच में जुटी पुलिस
नजीबाबाद के अमीखानपुर उर्फ जट्टीवाला गांव का मामला, दिवंगत पिता महेंद्र नाथ के नाम दर्ज करीब 90 बीघा जमीन में से 26 बीघा पर कब्जे की साजिश का आरोप, दो आरोपी जेल भेजे गए
बिजनौर। नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के गांव अमीखानपुर उर्फ जट्टीवाला में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के परिवार की जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री के दिवंगत पिता महेंद्र नाथ के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज जमीन के एक हिस्से को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपने नाम कराने का प्रयास किया गया। मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार प्रकरण में नामजद आरोपियों में से दो को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
विवादित भूमि में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पिता महेंद्र नाथ के नाम राजस्व अभिलेखों में जमीन दर्ज बताई गई है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार नजीबाबाद क्षेत्र के अमीखानपुर उर्फ जट्टीवाला में उनके नाम करीब 90 बीघा भूमि रही है। वर्तमान में गाटा संख्या 349, 375, 377 और 429 की खतौनी में महेंद्र नाथ का नाम दर्ज होने की बात सामने आई है।
कमलनाथ के नाम विरासत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू
महेंद्र नाथ की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों के नाम भूमि दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा निवासी पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की ओर से 18 मई को विरासत के आधार पर भूमि को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने के लिए आवेदन किया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि योगेश कुमार ने अधिवक्ता महबूब आलम के माध्यम से तहसीलदार न्यायालय में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए। इनमें महेंद्र नाथ का मृत्यु प्रमाणपत्र, आधार संबंधी दस्तावेज और कमलनाथ के उनके पुत्र होने से संबंधित वारिसान प्रमाण शामिल हैं।
बताया गया है कि महेंद्र नाथ की मृत्यु दिल्ली के एक अस्पताल में हुई थी। दस्तावेजों के आधार पर अब राजस्व रिकॉर्ड में उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
पांच महीने से तहसीलदार न्यायालय में लंबित है मामला
कमलनाथ की ओर से दिए गए आवेदन पर राजस्व विभाग की प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामला तहसीलदार न्यायालय तक पहुंचा। बताया गया कि लेखपाल की ओर से मृतक के बाहरी होने तथा वारिसों के दूर रहने का हवाला देते हुए प्रकरण को आगे बढ़ाया गया।
हालांकि, आवेदन किए जाने के कई महीने बाद भी भूमि को विरासत के आधार पर कमलनाथ और उनकी बहनों के नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इसी बीच जमीन से संबंधित दूसरे वाद और कथित फर्जी दस्तावेज सामने आने के कारण मामला और जटिल हो गया है।
26 बीघा जमीन को लेकर विवाद
जमीन के करीब 26 बीघा हिस्से को लेकर कब्जे की कथित कोशिश का आरोप लगाया गया है। तहसीलदार न्यायालय में इस भूमि से संबंधित एक अलग वाद भी चल रहा है, जिसमें धर्मपाल बनाम ग्राम सभा का मामला बताया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से आरोप लगाया गया है कि जमीन पर दावा मजबूत करने के लिए एक ऐसी वसीयत प्रस्तुत की गई, जो कथित तौर पर पंजीकृत नहीं है। इसी दस्तावेज को लेकर राजस्व और पुलिस दोनों स्तर पर जांच की जा रही है।
मामले में यह भी सामने आया है कि महेंद्र नाथ का मृत्यु प्रमाणपत्र दाखिल किया गया था, जो 10 अप्रैल 2003 को नजीबाबाद से जारी बताया जा रहा है। दस्तावेजों की वास्तविकता और उनके आधार पर किए गए दावों की जांच अब जांच एजेंसियों के स्तर पर की जा रही है।
चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी, दो आरोपी जेल भेजे गए
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की ओर से नजीबाबाद थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में धर्मपाल सिंह, जसबिंदर सिंह ढिल्लो, विजय शंकर पांडेय निवासी नजीबाबाद तथा लेखपाल डेविड कुमार के नाम सामने आए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने आपस में साजिश कर जमीन को फर्जी तरीके से अपने नाम कराने का प्रयास किया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि लेखपाल डेविड कुमार समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किया जमीन का निरीक्षण
विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने विवादित जमीन का मौके पर निरीक्षण किया। पुलिस ने स्थल का नक्शा-नजरी तैयार किया और भूमि की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।
इसके अलावा पुलिस राजस्व विभाग से संबंधित अभिलेख भी जुटा रही है। चकबंदी रिकॉर्ड, खतौनी, गाटा संख्या, पूर्व में दर्ज नाम तथा भूमि से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि जमीन पर किसका वैधानिक अधिकार है और कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने या इस्तेमाल करने में किसकी भूमिका रही।
1997-98 में हुई थी चकबंदी
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार इस क्षेत्र में वर्ष 1997-98 के दौरान चकबंदी की प्रक्रिया हुई थी। बताया गया है कि चकबंदी से पहले भी महेंद्र नाथ का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज रहा है।
इसी कारण पुलिस और प्रशासन के लिए पुराने राजस्व रिकॉर्ड भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। जांच अधिकारी पुराने दस्तावेजों और वर्तमान खतौनी में दर्ज विवरण का मिलान कर रहे हैं।
लेखपाल की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में लेखपाल डेविड कुमार का नाम प्राथमिकी में शामिल होने के बाद राजस्व विभाग में भी मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लेखपाल संघ के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में जिलाधिकारी से मुलाकात की है।
एक ओर पुलिस ने लेखपाल को भी मामले में आरोपी बनाया है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर स्थिति अलग है। प्रशासन की ओर से पुलिस जांच से अलग अपनी स्वतंत्र जांच भी शुरू कराई गई है।
एसडीएम नजीबाबाद को प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासनिक जांच में राजस्व रिकॉर्ड, आवेदन प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तथा जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
पुलिस और प्रशासन की जांच से साफ होगी तस्वीर
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के परिवार की जमीन से जुड़े इस मामले में अब पुलिस और प्रशासन दोनों स्तरों पर जांच चल रही है। पुलिस जहां कथित फर्जी दस्तावेज और जमीन पर कब्जे की कोशिश के आरोपों की विवेचना कर रही है, वहीं राजस्व विभाग भूमि के उत्तराधिकार और रिकॉर्ड में नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया की जांच कर रहा है।
मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने, राजस्व न्यायालय में चल रही कार्यवाही और संबंधित दस्तावेजों की वैधानिकता स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल पुलिस राजस्व अभिलेख और अन्य दस्तावेज जुटाकर पूरे प्रकरण की कड़ियों को जोड़ने में लगी है।








