दिल्ली हाईकोर्ट ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस, बचाव अभियान तेज़ करने के निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर कड़ा रुख अपनाते हुए एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि जिम्मेदारी से भागना संभव नहीं है और बचाव अभियान को तेज़ करने का निर्देश दिया। हादसे में सात लोगों की मौत हो चुकी है और कई छात्र अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है।
हादसे का विवरण
- स्थान: सत्य निकेतन, दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी कैंपस के पास।
- घटना: पाँच मंज़िला Hostel Daze Boys PG बिल्डिंग अचानक ढह गई।
- मृतक: अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
- घायल/फंसे हुए: दर्जनों छात्र मलबे में दबे होने की आशंका, कई गंभीर रूप से घायल।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
- अदालत ने हादसे को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताया।
- कहा कि 50 छात्रों की जान दांव पर लगी है, और यह स्थिति अस्वीकार्य है।
- कोर्ट ने एमसीडी, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय को जिम्मेदार ठहराते हुए पूछा कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई और जांच
- बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया।
- दिल्ली पुलिस ने कुलपति हत्या (culpable homicide) और लापरवाही के आरोप में मामला दर्ज किया।
- जनहित याचिका (PIL): दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल, जिसमें
- मृतकों के परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवज़ा
- सभी पीजी और हॉस्टलों का सुरक्षा ऑडिट
- हादसे की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
बचाव अभियान
- NDRF, SDRF, ITBP और दिल्ली फायर सर्विस की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हैं।
- भारी मशीनों से मलबा हटाया जा रहा है और अब तक 12 लोगों को जीवित निकाला गया है।
सुरक्षा और भविष्य की चिंताएँ
- अदालत ने कहा कि यह हादसा छात्र आवास की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमी को उजागर करता है।
- दिल्ली विश्वविद्यालय और सरकार को निर्देश दिया गया है कि पीजी और हॉस्टलों की नियमित जांच हो।
- विशेषज्ञों का मानना है कि अनधिकृत निर्माण और खराब रखरखाव ऐसे हादसों की बड़ी वजह हैं।







