देशभर में जनगणना का शेड्यूल जारी, 25 जनवरी से शुरू होगी प्रक्रिया, इन राज्यों को फिलहाल छूट

केंद्र सरकार के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, जनगणना 2027 का काम 25 जनवरी से 28 फरवरी तक निर्धारित किया गया है। कुछ राज्यों और हिमपात प्रभावित क्षेत्रों में फिलहाल जनगणना नहीं होगी। इन क्षेत्रों के लिए अलग से कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। वहीं, 1 से 5 मार्च तक संशोधन का चरण प्रस्तावित है।

नई दिल्ली। भारत में आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के कार्यक्रम से संबंधित तारीखों की घोषणा की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्धारित कार्यक्रम के तहत देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच जनगणना का कार्य किया जाएगा। हालांकि, कुछ राज्यों में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों और हिमपात जैसी भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वहां की प्रक्रिया के लिए अलग कार्यक्रम जारी किया जाएगा।

जनगणना देश की आबादी, परिवारों, आवासीय परिस्थितियों और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाने का एक प्रमुख राष्ट्रीय अभियान है। इसके माध्यम से सरकार को विभिन्न क्षेत्रों की जनसंख्या संबंधी आवश्यकताओं को समझने और भविष्य की विकास योजनाएं तैयार करने में मदद मिलती है।

25 जनवरी से 28 फरवरी तक जनगणना का काम

घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, जनगणना 2027 के लिए 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक की अवधि निर्धारित की गई है। इस दौरान निर्धारित क्षेत्रों में जनगणना संबंधी कार्य पूरे किए जाएंगे। इसके बाद 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक संशोधन यानी रिविजन राउंड आयोजित करने की योजना है।

इस अतिरिक्त चरण का उद्देश्य निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत जुटाई गई जानकारी की समीक्षा करना और आवश्यक संशोधन करना होगा। इससे जनगणना से संबंधित आंकड़ों की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने में सहायता मिल सकती है।

जनगणना के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि निर्धारित की गई है। संदर्भ तिथि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसके आधार पर जनसंख्या से संबंधित आंकड़ों को एक निश्चित समय के संदर्भ में दर्ज और संकलित किया जाता है।

हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में परिस्थितियों के अनुसार कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है। इसलिए संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नजर रखना जरूरी होगा।

किन राज्यों में फिलहाल नहीं होगी जनगणना?

सरकार की ओर से जारी कार्यक्रम से संबंधित जानकारी के अनुसार, कुछ राज्यों और क्षेत्रों को निर्धारित समय-सारणी से बाहर रखा गया है। इनमें मणिपुर, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और लद्दाख शामिल हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के हिमपात प्रभावित क्षेत्रों में भी इस अवधि के दौरान जनगणना का काम नहीं किया जाएगा।

मणिपुर के संबंध में अगली घोषणा तक अलग व्यवस्था लागू रहने की जानकारी दी गई है। शेष प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी अलग तारीखों की घोषणा किए जाने की बात कही गई है।

इन क्षेत्रों को अलग रखने के पीछे स्थानीय परिस्थितियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं। कुछ राज्यों में चुनावी कार्यक्रम के कारण प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव रहता है, जबकि पर्वतीय और हिमपात प्रभावित क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान आवागमन तथा सरकारी कामकाज में कठिनाइयां सामने आ सकती हैं।

ऐसे में संबंधित क्षेत्रों में जनगणना की प्रक्रिया कब शुरू होगी, इसकी जानकारी अलग से जारी होने वाले आधिकारिक कार्यक्रम से स्पष्ट होगी।

अगले साल इन राज्यों में विधानसभा चुनाव

जनगणना के निर्धारित कार्यक्रम से बाहर रखे गए राज्यों में कई ऐसे राज्य भी हैं, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं।

विधानसभा चुनाव के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। चुनाव संबंधी तैयारियों, मतदान और अन्य व्यवस्थाओं के बीच जनगणना जैसे बड़े अभियान का संचालन अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकता है।

इसी तरह, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के हिमपात प्रभावित इलाकों में मौसम तथा भौगोलिक परिस्थितियों के कारण निर्धारित समय पर घर-घर पहुंचना कठिन हो सकता है।

हालांकि, इन राज्यों और क्षेत्रों में जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह रद्द नहीं की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनके लिए अलग समय-सारणी जारी की जाएगी। संबंधित क्षेत्रों में काम शुरू होने की तारीखों को लेकर अंतिम जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से ही स्पष्ट होगी।

आजादी के बाद भारत की आठवीं जनगणना

जनगणना 2027 स्वतंत्रता के बाद भारत की आठवीं जनगणना होगी। यह देश में जनसंख्या और परिवारों से संबंधित व्यापक आंकड़े जुटाने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

जनगणना सामान्य तौर पर प्रत्येक दस वर्ष में आयोजित की जाती है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि अगली जनगणना 2021 में प्रस्तावित थी। हालांकि, कोरोना महामारी के कारण इस प्रक्रिया को निर्धारित समय पर पूरा नहीं किया जा सका।

इसके बाद जनगणना को लेकर तैयारियां और प्रशासनिक प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई गईं। अब 2027 के लिए कार्यक्रम सामने आने के साथ ही देश की नई जनसंख्या संबंधी जानकारी जुटाने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।

नई जनगणना से प्राप्त आंकड़े केंद्र और राज्य सरकारों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इनके आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, परिवहन, पेयजल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की जरूरतों का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

दो चरणों में पूरी होगी जनगणना की प्रक्रिया

जनगणना की पूरी प्रक्रिया को दो प्रमुख चरणों में संपन्न करने की योजना है। इसमें मकानों और उनकी स्थिति से संबंधित जानकारी जुटाने के साथ-साथ लोगों की गणना भी शामिल होगी।

पहला चरण: मकानों की सूची और आवास संबंधी जानकारी

इस चरण में मकानों की सूची तैयार करने और उनकी स्थिति से संबंधित विवरण जुटाने का काम किया जाएगा। इससे आवासीय सुविधाओं और मकानों की उपलब्धता से संबंधित जानकारी संकलित करने में सहायता मिलेगी।

दूसरा चरण: जनसंख्या की गणना

दूसरे चरण में नागरिकों की गणना और निर्धारित प्रश्नों के माध्यम से जरूरी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शामिल होगी। इस चरण से देश की आबादी तथा परिवारों से संबंधित व्यापक आंकड़े प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

दोनों चरणों का उद्देश्य देश की जनसंख्या और आवासीय स्थिति की अधिक व्यवस्थित तस्वीर तैयार करना है। इन आंकड़ों का इस्तेमाल नीतियां बनाने, सरकारी योजनाओं की जरूरतों का आकलन करने और विकास संबंधी प्राथमिकताएं तय करने में किया जा सकता है।

जनगणना के दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी एकत्र की जाएगी। नागरिकों को आधिकारिक निर्देशों के अनुरूप सही जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता होगी।

जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट

जनगणना 2027 को बड़े स्तर पर संचालित करने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण बजट का प्रावधान किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

देशव्यापी जनगणना के संचालन में कर्मचारियों की तैनाती, प्रशिक्षण, प्रशासनिक प्रबंधन, आंकड़ों का संकलन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शामिल होती हैं। इतने बड़े स्तर पर अभियान चलाने के लिए व्यापक संसाधनों और समन्वय की जरूरत होती है।

जनगणना से जुटाए गए आंकड़े भविष्य की योजनाओं के निर्माण में उपयोगी साबित होते हैं। इनके माध्यम से यह समझने में मदद मिलती है कि किन क्षेत्रों में आबादी का दबाव अधिक है, कहां नई सुविधाओं की जरूरत है और किन समुदायों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

2011 की जनगणना में कितनी थी भारत की आबादी?

भारत में पिछली जनगणना 2011 में आयोजित की गई थी। उस समय देश की कुल आबादी लगभग 121 करोड़ दर्ज की गई थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इसमें पुरुषों की संख्या लगभग 62.32 करोड़ और महिलाओं की संख्या करीब 58.75 करोड़ थी।

इसी जनगणना के दौरान देश में परिवारों की कुल संख्या लगभग 24.95 करोड़ दर्ज की गई थी।

इन आंकड़ों ने उस समय भारत की जनसंख्या संरचना और परिवारों की स्थिति का महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध कराया था। हालांकि, 2011 के बाद देश की जनसंख्या में हुए बदलावों की पूरी तस्वीर जानने के लिए नई जनगणना के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।

नई जनगणना से यह समझने में मदद मिलेगी कि पिछले वर्षों में आबादी के आकार, परिवारों की संख्या और आवासीय परिस्थितियों में किस प्रकार के बदलाव आए हैं। इसके साथ ही, विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के बीच जनसंख्या संबंधी अंतर का आकलन करने के लिए भी नए आंकड़े उपयोगी होंगे।

जनगणना से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?

जनगणना का महत्व केवल आबादी की गिनती तक सीमित नहीं है। इससे प्राप्त आंकड़े देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जनगणना के आंकड़ों से सरकार को निम्नलिखित क्षेत्रों में योजना बनाने में मदद मिल सकती है:

  • शिक्षा: विभिन्न क्षेत्रों में स्कूलों और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं की जरूरत का आकलन।
  • स्वास्थ्य: अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकताओं को समझना।
  • आवास: मकानों और आवासीय परिस्थितियों से संबंधित जानकारी के आधार पर योजनाएं तैयार करना।
  • बुनियादी सुविधाएं: पेयजल, सड़क, परिवहन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं की जरूरतों का आकलन।
  • विकास योजनाएं: अलग-अलग क्षेत्रों की जनसंख्या संबंधी जरूरतों के अनुसार सरकारी संसाधनों की योजना बनाना।

इस तरह, जनगणना से प्राप्त आंकड़े दीर्घकालीन विकास नीतियों और सार्वजनिक सेवाओं की योजना बनाने में सहायक हो सकते हैं।

जनगणना 2027: आगे क्या होगा?

जनगणना 2027 के लिए तारीखों की घोषणा के बाद अब निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रशासनिक तैयारियां आगे बढ़ने की उम्मीद है। संबंधित अधिकारियों को जनगणना के विभिन्न चरणों के संचालन, कर्मचारियों की व्यवस्था और जानकारी जुटाने की प्रक्रिया से जुड़े कार्य करने होंगे।

वहीं, फिलहाल निर्धारित कार्यक्रम से बाहर रखे गए राज्यों और क्षेत्रों के लिए अलग तारीखों की घोषणा महत्वपूर्ण होगी। खासतौर पर चुनाव वाले राज्यों और हिमपात प्रभावित क्षेत्रों में जनगणना कब शुरू होगी, यह आगामी आधिकारिक जानकारी से स्पष्ट होगा।

कुल मिलाकर, जनगणना 2027 देश की आबादी और आवासीय स्थिति से संबंधित नए आंकड़े जुटाने का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान होगा। पिछली जनगणना 2011 में होने के कारण इस बार जुटाए जाने वाले आंकड़ों पर विशेष ध्यान रहेगा। नई जानकारी से सरकार को बदलती जनसंख्या संबंधी जरूरतों को समझने और भविष्य की विकास योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने में मदद मिल सकती है।