पुरुष के पिता नहीं पत्नी का नाम पूछते हैं शूरवीर
- महिला सम्मान की अलख जगा रहे चिकित्सक
- जीवन में महिला मरीज़ को छूते तक नहीं
बिजनौर, शहबाज़ अनवर
कोई पुरुष मरीज़ आता है, चिकित्सक उनका पर्चा बनाते हैं, मरीज़ का नाम लिखने के बाद चिकित्सक इस पुरुष मरीज़ से उनकी पत्नी का नाम पूछते हैं, हालांकि इस दौरान मरीज़ पत्नी का नाम बताने को लेकर थोड़ा असहज महसूस करता है, लेकिन बाद में उन्हें पता चलता है कि डॉक्टर साहब मरीज़ के पिता का नहीं बल्कि पत्नी का नाम लिखते हैं, ये सब सिर्फ महिला सम्मान को देखते हुए किया जाता है।
महिला सम्मान बढ़ाने के लिए बिजनौर के होम्योपैथिक चिकित्सक शूरवीर सिंह एक अलग अलख जगा रहे हैं। डॉक्टर शूरवीर ने बताया कि एक महिला जो शादी के बाद अपने पति के लिए पूरा श्रद्धा भाव रखती है, उसके साथ जीने मरने की कसमें खाती है, देवी का रूप होती है, ये सब उसके सम्मान के लिए है। बताते हैं के वर्ष 1994 में उन्होंने पिता के नाम की जगह पत्नी का नाम लिखने की ये मुहिम शुरू की थी। उनके डेटा में पुरुष मरीज़ के नाम के साथ उनकी पत्नी का नाम ही लिखा मिलेगा।
ज़िंदगी के साथ जीना मक़सद तो इज़्ज़त तो बनती है
डॉक्टर शूरवीर अपनी इस मुहिम के पीछे ये भी तर्क देते हैं कि जो पुरुष मरीज़ उम्रदराज़ हैं, उनके पिता इस दुनिया में नहीं रहे, ऐसे में उनके पिता का नाम लिखने का क्या औचित्य है, जीवन संगनी साथ होती है, उसको सम्मान मिलना ही चाहिए।
‘ मैं महिला मरीज़ों को छूता तक नहीं.”
डॉक्टर शूरवीर दावा करते हैं कि वह महिला मरीज़ों के शरीर को कभी नहीं छूते हैं। कहते हैं कि उनकी चिकित्सकीय पद्धति में हाल – चाल जानने के बाद ही मरीज़ की बीमारी को डायग्नोज़ कर लेते हैं, ऐसे में महिला के मान सम्मान को देखते हुए उसे छूना बेहतर नहीं समझते हैं, आपातकाल की स्थिति में महिला कम्पाउंडर उपस्थित रहती हैं।






