ई-पंजीकरण रजिस्ट्री योजना के विरोध में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन
बिजनौर जिले में ई-पंजीकरण मॉड्यूल रजिस्ट्री योजना को लेकर अधिवक्ताओं के बीच असंतोष गहराता जा रहा है। सोमवार को जिला रेवेन्यू बार एसोसिएशन के दोनों गुटों ने इस योजना के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित अलग-अलग ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपे। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि यह योजना लागू की जाती है तो इससे अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं के रोजगार पर गंभीर असर पड़ेगा।

योजना का विरोध क्यों
ई-पंजीकरण मॉड्यूल का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित करना है। सरकार का तर्क है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। लेकिन अधिवक्ताओं का मानना है कि इस योजना से पारंपरिक व्यवस्था टूट जाएगी और हजारों लोगों का रोजगार खतरे में पड़ जाएगा।
- अधिवक्ताओं की चिंता: उनका कहना है कि ई-पंजीकरण से दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी।
- रोजगार पर असर: अधिवक्ताओं का दावा है कि यह योजना लागू होने पर हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
- पारंपरिक व्यवस्था: वर्तमान व्यवस्था में अधिवक्ताओं की सक्रिय भागीदारी होती है, जिसे डिजिटल प्रणाली कमजोर कर सकती है।
प्रदर्शन का स्वरूप
सोमवार को जिला रेवेन्यू बार एसोसिएशन के दोनों गुटों ने अलग-अलग ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपे। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग की गई कि ई-पंजीकरण मॉड्यूल रजिस्ट्री योजना को तत्काल वापस लिया जाए।
- अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
- ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि योजना लागू होने पर अधिवक्ताओं और संबंधित पेशेवरों की आजीविका पर संकट आ जाएगा।
- दोनों गुटों ने अलग-अलग ज्ञापन देकर यह स्पष्ट किया कि विरोध व्यापक है और केवल एक पक्ष तक सीमित नहीं है।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि ई-पंजीकरण से रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और आम जनता को सुविधा मिलेगी। ऑनलाइन प्रणाली से समय की बचत होगी और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी।
- पारदर्शिता: डिजिटल माध्यम से रजिस्ट्री करने पर रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे।
- सुविधा: नागरिकों को लंबी कतारों और जटिल प्रक्रियाओं से मुक्ति मिलेगी।
- भ्रष्टाचार पर रोक: ऑनलाइन प्रणाली से बिचौलियों की भूमिका कम होगी।
अधिवक्ताओं की चेतावनी
अधिवक्ताओं ने साफ कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया तो वे बड़े आंदोलन की ओर बढ़ेंगे। उनका कहना है कि यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की पारंपरिक संरचना को बचाने का सवाल भी है।
- अधिवक्ताओं ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन यदि सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
- उन्होंने यह भी कहा कि ई-पंजीकरण योजना लागू होने पर न्यायिक प्रक्रिया में अधिवक्ताओं की भूमिका कमजोर हो जाएगी।
बिजनौर में ई-पंजीकरण रजिस्ट्री योजना को लेकर अधिवक्ताओं का विरोध लगातार बढ़ रहा है। सरकार जहां इसे पारदर्शिता और सुविधा की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं अधिवक्ता इसे रोजगार और न्यायिक व्यवस्था पर खतरा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।








