पुष्पा चक्रवर्ती अब नहीं रहीं


बिजनौर। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक एवं पत्रकार पी सी चक्रवर्ती की सहधर्मिणी श्रीमती पुष्पा चक्रवर्ती का एम्स ऋषिकेश में निधन हो गया।
आपातकाल के दौरान सी पी एम के अभिलेख गोपनीय ढंग से सुरक्षित रखने, किसान मजदूर और पत्रकार हित के आंदोलन में पूर्ण सहयोग देने, तथा सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने के साथ ही चक्रवर्ती परिवार को नया देने में सफल रही श्रीमती पुष्पा चक्रवर्ती जीवन मृत्यु के बीच लम्बा संघर्ष करते हुए एम्स के आई सी यू वार्ड में चिर निद्रा में लीन हो गई।

श्रीमती पुष्पा जी यूँ तो पिछले कई सालों से बीमार चल रही थी। लेकिन जून 2025 से उनको बीमारियों ने गंभीर रूप से जकड़ लिया था। मुरादाबाद, श्रीनगर में उपचार के बाद बेहद नाजुक हालत में 9 अक्टूबर को उन्हें एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के बाद उन्हें स्वास्थ्य लाभ मिला, लेकिन फिर तबीयत बिगड़ जाने पर उन्हें पुनः एम्स में भर्ती किया गया, जहाँ 26 नवम्बर को उनका स्पाईन ऑपरेट किया गया। लगातार एम्स के चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जाता रहा। 12 मई को उन्हें गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। उपचार से उन्हें स्वास्थ्य लाभ मिला और 3 जून को उन्हें अस्पताल से घर आना था, लेकिन 2/3 जून की रात उन्हें स्टोक आया और उन्हें नाजुक हालत में एम्स ऋषिकेश में भर्ती किया गया। वे निरंतर वेंटीलेटर पर रहीं। 5/6 जून की रात हाई रिस्क पर उनका ब्रेन ऑपरेट किया गया। उनकी हालत में उतार चढ़ाव होता रहा और वे जीवन मृत्यु के बीच संघर्ष करती रहीं लेकिन 13/14 जून की रात उन पर भारी पड़ गई और और मृत्यु से हार मानते हुए उन्होंने ढाई बजे अन्तिम सांस ली तथा चिर निद्रा में लीन हो गई। उनकी पार्थिव देह पहले बिजनौर और फिर ग्राम श्रवणपुर जहां से अन्तिम यात्रा अपराह्न एक बजे शुरू होगी। हरिद्वार में उनका अन्तिम संस्कार किया जाएगा।