यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: संपत्ति रजिस्ट्री, परिवहन और कर्मचारियों पर नए नियम
उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में आज कई अहम निर्णय लिए गए, जिनका सीधा असर आम जनता, परिवहन व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा।
🏠 संपत्ति रजिस्ट्री में सख्ती
स्टांप एवं पंजीयन विभाग ने प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब स्टाम्प पेपर तभी जारी होगा जब विक्रेता यह साबित कर देगा कि वह संपत्ति का वास्तविक मालिक है। इसके लिए रजिस्ट्री से पहले विक्रेता के नाम का मिलान खतौनी (राजस्व रिकॉर्ड) से अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
- पहले केवल आधार कार्ड और पहचान पत्र के आधार पर स्टाम्प मिल जाता था।
- नए नियम से अब किसी और की जमीन को फर्जी तरीके से बेचना नामुमकिन होगा।
🚍 परिवहन व्यवस्था में बदलाव
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने घोषणा की कि प्रदेश की 59,163 ग्राम सभाओं को सीधे बस सेवा से जोड़ा जाएगा।
- हर गांव में दिन में कम से कम दो बार बसें उपलब्ध होंगी।
- ग्रामीणों के आवागमन को आसान बनाने के लिए यह योजना लागू होगी।
- ओला और उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों को अब उत्तर प्रदेश में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
- बिना राज्य पंजीकरण के कैब सेवाएं यूपी में संचालित नहीं हो सकेंगी।
👨💼 कर्मचारियों के लिए निवेश नियम
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों को अब हर साल अपनी अचल संपत्ति की घोषणा करनी होगी।
- यदि कोई कर्मचारी अपने 6 महीने के मूल वेतन से अधिक राशि शेयर बाजार या अन्य माध्यमों में निवेश करता है, तो उसे इसकी सूचना सरकार को देना अनिवार्य होगा।
- इसका उद्देश्य कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है।
🏘️ आवास और खेल सुविधाएं
- कांशीराम आवास योजना की इमारतों की रंगाई-पुताई कराई जाएगी।
- ये आवास दलितों के लिए सुरक्षित रहेंगे और अवैध रूप से रह रहे लोगों को हटाया जाएगा।
- अयोध्या में स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए 2500 स्क्वायर मीटर जमीन दी जाएगी।







