मोहन भागवत: सरसंघचालक पद जाति से परे, केवल हिंदू होगा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का सर्वोच्च पद सरसंघचालक किसी जाति-विशेष से जुड़ा नहीं होता। इस पद पर चयन जाति के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि केवल यह शर्त होती है कि व्यक्ति हिंदू होना चाहिए।

बयान का सार

  • मोहन भागवत ने कहा कि सरसंघचालक ब्राह्मण, क्षत्रिय या किसी अन्य जाति का प्रतिनिधि नहीं होता।
  • उन्होंने जोर दिया कि आरएसएस में नेतृत्व का चयन जाति से परे होता है।
  • सरसंघचालक बनने के लिए केवल हिंदू होना आवश्यक है, जातिगत पहचान का कोई महत्व नहीं है।

संदर्भ और महत्व

  • यह बयान भारतीय समाज में जातिगत भेदभाव और पहचान को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आया है।
  • आरएसएस लंबे समय से “हिंदू एकता” पर बल देता रहा है, और यह वक्तव्य उसी विचारधारा को मजबूत करता है।
  • भागवत का संदेश संघ की संगठनात्मक नीति को स्पष्ट करता है कि नेतृत्व का आधार जाति नहीं, बल्कि हिंदू पहचान है।