शब-ए-बरात पर जामा मस्जिद में हुआ इजलास, उलेमा ने नसीहत की खास

बिजनौर(चिंगारी)। शब-ए-बारात की रात की बरकतों से फैज़याब होने के लिए ऐतिहासिक जामा मस्जिद चाहशीरी बिजनौर में इशा की नमाज़ के बाद अजीमुश्शान इजलास-ए-आम का आयोजन हुआ।मंगलवार की रात को इस्लाह-ए-मुआशिरा (समाज सुधार) के उनवान से आयोजित इजलास में उलेमा-ए-किराम ने अपने रूह-परवर बयानों से सामईन को मुस्तफीज़ फरमाया।प्रोग्राम की शुरुआत कारी फैज़ान कासमी ने क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत से की। कारी मोहम्मद जमशेद ने नात-ए-पाक पेश की। प्रोग्राम की निगरानी मुफ्ती वकार ने की, जबकि सदरत कारी हन्नान साहब ने फरमाई।इस मौके पर मौलाना आदम मुस्तफ़ा ने अपने ख़िताब में वालिदैन की इज़्ज़त और उनकी ख़िदमत पर ख़ास तवज्ज़ोह दी। उन्होंने फरमाया कि माँ-बाप की ख़िदमत जन्नत की राह है। अल्लाह तआला ने वालिदैन की इताअत को बहुत अहमियत दी है। उन्होंने नसीहत फरमाई कि गुनाहों से बचते हुए दीन की रौशनी में ज़िंदगी गुज़ारें। नबी-ए-करीम के बताए हुए रास्ते पर चलें और वालिदैन की ख़िदमत से जन्नत हासिल करें। उनके बयान ने हाज़िरीन के दिलों को छू लिया और वालिदैन के हुक़ूक़ की अहमियत को उजागर किया। इसके बाद मौलाना मोहम्मद ज़ाहिद ने दुनिया के फितनों से बचने और अल्लाह तआला से तौबा करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने फरमाया कि आज के ज़माने में फितने बहुत हैं, जो इंसान को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। अल्लाह से सच्ची तौबा करके गुनाहों से पाक हो जाएँ और अपनी इस्लाह करें। उन्होने दुनिया के फितनों से होशियार रहने और आख़िरत की फिक्र करने की तालीम दी।इसके अलावा मुफ्ती ओवैस अकरम ने शब-ए-बारात की फज़ीलत बयान की और रमज़ान की तैयारी करने, ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त इबादतों में गुज़ारने की तरगीब दी।मदरसे के तालिब-ए-इल्म मोहम्मद अज़हान, हारिस और मोहम्मद साद मिर्ज़ा ने भी क़ुरआन की तिलावत करके प्रोग्राम की रौनक़ बढ़ाई।इजलास में लोगों की भारी भीड़ रही। उलेमा-ए-किराम के बयानों से लोगो ने रूहानी सुकून हासिल किया और शब-ए-बारात की बरकतों से मुस्तफीज़् हुए।प्रोगाम जामा मस्जिद के इमामो ख़तीब कारी वारीस के इंतज़ाम में मुनअक़िद हुआ। कार्यकम में कारी शुऐब, अल्ताफ अहमद, नोशद उर्फ नोश ,अब्दुलाह, अब्दुल कुद्दुस, अकरम खान आदि का सहयोग रहा। कार्यक्रम में खास तौर से मस्जिद के मुतवल्ली जावेद आफताब एडवोकेट, जीशान मिर्ज़ा , झालू के साबिक चैयरमेन शहज़ाद अहमद, मोहम्मद अहमद, रफत उमर आदि की मोजूदगी रही।