सुप्रीम कोर्ट में IPAC रेड पर तीखी बहस: ईडी के आरोप और बंगाल सरकार

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सुप्रीम कोर्ट में IPAC रेड पर तीखी बहस: ईडी के आरोप और बंगाल सरकार की सफाई

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को इंडियन पॉलिटिकल ऐक्शन कमेटी (IPAC) पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रेड को लेकर जोरदार बहस हुई। इस बहस में ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि बंगाल सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए सफाई दी। मामला इतना संवेदनशील था कि कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।


ईडी का पक्ष: जांच में बाधा और कानून का उल्लंघन

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में ईडी की ओर से बहस करते हुए कहा कि यह घटना बेहद चौंकाने वाली है। उनका दावा था कि ईडी पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की धारा 17 के तहत कार्रवाई कर रही थी, लेकिन इस कार्रवाई में जानबूझकर बाधा डाली गई।

  • मुख्यमंत्री की मौजूदगी पर सवाल: मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद छापे वाली जगह पर पहुंच गईं और जांच में रुकावट डाली।
  • राज्य पुलिस की भूमिका: उनका आरोप था कि राज्य पुलिस ने राजनीतिक तरीके से काम किया और केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई को प्रभावित किया।
  • दस्तावेज और उपकरण जब्त करने का आरोप: मेहता ने दावा किया कि मुख्यमंत्री डीजीपी, कमिश्नर और डीसीपी के साथ गैरकानूनी तरीके से परिसर में घुसीं, ईडी अधिकारियों के फोन ले लिए और कुछ दस्तावेज अपने कब्जे में कर लिए।

मेहता ने कोर्ट से कहा कि अगर ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त किया गया तो इससे केंद्रीय बलों का मनोबल टूटेगा और भविष्य में जांच एजेंसियों का काम प्रभावित होगा। उन्होंने मांग की कि इस मामले में शामिल अधिकारियों को निलंबित किया जाए ताकि एक मिसाल कायम हो।


कोर्ट की प्रतिक्रिया और गंभीर टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट खुद इन अधिकारियों को निलंबित कर दे? इस पर मेहता ने कहा कि कोर्ट सीधे निलंबन का आदेश न दे, बल्कि सक्षम अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दे।

मेहता ने पीएमएलए की धारा 54 का भी उल्लेख किया, जिसके तहत जांच में बाधा डालने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक है और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया जाएगा।


हाईकोर्ट की सुनवाई और टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आरोप

ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं ने कोर्ट परिसर को जंतर मंतर जैसा बना दिया।

  • हंगामे का आरोप: मेहता ने कहा कि यह हंगामा अचानक नहीं हुआ था, बल्कि टीएमसी की लीगल सेल ने इसे योजनाबद्ध तरीके से किया।
  • वकीलों को बाधित करने का आरोप: ईडी का कहना था कि उनके वकील एएसजी को हाईकोर्ट में ठीक से बहस नहीं करने दी गई और उनका माइक बार-बार म्यूट किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी की कि क्या कोर्ट को जंतर मंतर में बदल दिया गया? मेहता ने इसका जवाब ‘हां’ में दिया।


बंगाल सरकार का पक्ष: कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी की दलीलें

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा। उन्होंने ईडी के आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया।

  • जानकारी की ‘कलरिंग’ का आरोप: सिब्बल ने कहा कि ईडी जानबूझकर जानकारी को रंग-रूप देकर पेश कर रही है ताकि पूर्वाग्रह पैदा हो।
  • मुख्यमंत्री पर लगाए गए आरोपों का खंडन: सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी उपकरण जब्त करने का आरोप झूठा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी केवल अपना लैपटॉप और आईफोन लेकर गई थीं।
  • पंचनामा का हवाला: सिब्बल ने कहा कि ईडी की याचिका में कही गई बातें पंचनामा के विपरीत हैं। ईडी के हस्ताक्षर से यह साबित होता है कि कोई अवैध जब्ती नहीं हुई।

सिब्बल ने यह भी कहा कि प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनावी जानकारी थी और वही उपकरण ईडी ने लिया। इसे जांच में बाधा बताना गलत है।


राजनीतिक और कानूनी टकराव का बड़ा उदाहरण

यह मामला केवल एक रेड तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते टकराव का प्रतीक बन गया है।

  • केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर सवाल: ईडी का कहना है कि उनकी कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रभावित किया गया।
  • राज्य सरकार का बचाव: बंगाल सरकार का कहना है कि ईडी की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण थी और इसका उद्देश्य राजनीतिक सामग्री एकत्र करना था।
  • सुप्रीम कोर्ट की चिंता: कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि हाईकोर्ट की सुनवाई को बाधित किया गया और कहा कि ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए।

निष्कर्ष: आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या दिशा देता है।

  • यदि ईडी के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह राज्य सरकार और उसके अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
  • यदि बंगाल सरकार की सफाई को स्वीकार किया जाता है, तो यह ईडी की कार्रवाई पर सवाल खड़े करेगा।

यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बड़ा असर डाल सकता है। केंद्र और राज्य के बीच एजेंसियों की भूमिका को लेकर चल रही बहस इस घटना से और तेज हो गई है।