लोकसभा में भारी हंगामे के बीच G Ram G Bill पारित: विपक्ष का विरोध, बिल की प्रतियां फाड़ीं, स्पीकर ने जताई नाराजगी
संसद के शीतकालीन सत्र का चौदहवां दिन राजनीतिक टकराव और तीखी नोकझोंक का गवाह बना, जब लोकसभा में G Ram G Bill को लेकर अभूतपूर्व हंगामा देखने को मिला। यह विधेयक, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लेने वाला है, विपक्ष के कड़े विरोध और शोर-शराबे के बीच पारित कर दिया गया।
सरकार द्वारा पेश किया गया यह नया कानून—Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Grameen)—ग्रामीण रोजगार के लिए एक नए ढांचे का प्रस्ताव रखता है। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह न केवल राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालता है, बल्कि इसमें महात्मा गांधी का नाम हटाकर राष्ट्रपिता का अपमान भी किया गया है।
विपक्ष का जोरदार विरोध और सदन में हंगामा
जैसे ही बिल पर चर्चा आगे बढ़ी, विपक्षी दलों ने इसे स्थायी समिति के पास भेजने की मांग दोहराई। स्पीकर ओम बिरला ने यह कहते हुए मांग खारिज कर दी कि विधेयक पर पहले ही विस्तृत चर्चा हो चुकी है।
इसके बाद विपक्षी सांसद वेल में उतर आए, नारेबाजी शुरू कर दी और देखते ही देखते कई सांसदों ने बिल की प्रतियां फाड़कर हवा में उछाल दीं। यह दृश्य पूरे सदन में अफरा-तफरी का कारण बना।
स्पीकर ओम बिरला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा— “जनता ने आपको कागज फाड़ने और फेंकने के लिए संसद में नहीं भेजा है। पूरा देश आपको देख रहा है।”
उनकी चेतावनी के बावजूद हंगामा जारी रहा, जिसके बीच ही बिल को वॉइस वोट से पारित कर दिया गया। अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
विपक्ष के आरोप: गांधी का नाम हटाना ‘अपमान’
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, डीएमके के टीआर बालू, और समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने बिल का कड़ा विरोध किया।
विपक्ष का मुख्य तर्क था कि—
- कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाना राष्ट्रपिता का अपमान है।
- नया ढांचा राज्यों पर अधिक वित्तीय बोझ डालता है।
- MGNREGA गरीबों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच था, जिसे कमजोर किया जा रहा है।
कई विपक्षी सांसदों ने यह भी कहा कि सरकार लगातार नाम बदलने की राजनीति कर रही है, जबकि वास्तविक मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
सरकार का जवाब: “नाम बदलने का जुनून विपक्ष को है”
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों का जोरदार जवाब दिया। उन्होंने कहा कि—
- कांग्रेस ने दशकों तक केवल नेहरू परिवार के नाम पर योजनाएँ बनाईं, इसलिए वह अब नाम बदलने पर सवाल नहीं उठा सकती।
- मोदी सरकार का ध्यान केवल काम पर है, न कि नाम पर।
- MGNREGA भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका था, जिसे सुधारने के लिए नया कानून आवश्यक था।
- नया बिल व्यापक विचार-विमर्श और हितधारकों से चर्चा के बाद लाया गया है।
चौहान ने यह भी कहा कि सरकार महात्मा गांधी के आदर्शों को कमजोर नहीं कर रही, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं के माध्यम से उन्हें मजबूत कर रही है।
सदन में अराजकता और राजनीतिक संदेश
बिल पारित होने के बाद भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। कई सांसदों ने सदन के मध्य में खड़े होकर नारेबाजी की और बिल की प्रतियां फाड़कर विरोध दर्ज कराया।
यह घटना न केवल संसद की कार्यवाही में बाधा बनी, बल्कि राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट था—
- विपक्ष इस बिल को लेकर सड़क से संसद तक संघर्ष करने के मूड में है।
- सरकार इसे अपने विकास एजेंडे का हिस्सा बताकर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।







