भारत का नया भूकंप मैप जारी: हिमालयी क्षेत्र Zone VI में, 61% हिस्सा हाई रिस्क में
नई दिल्ली: भारत में भूकंप सुरक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने IS 1893 (Part 1): 2025 नामक नया Earthquake Design Code जारी किया है। इसके साथ ही देश का Seismic Map पहली बार इतने बड़े पैमाने पर बदला गया है। इस नए मैप में पूरा हिमालयी आर्क सबसे खतरनाक Zone VI में शामिल कर दिया गया है।
🔴 नया Zone VI: सबसे गंभीर भूकंप खतरे वाला क्षेत्र
- BIS ने पहली बार Zone VI की घोषणा की है, जो अब तक का सबसे गंभीर भूकंप जोखिम वाला क्षेत्र है।
- इसमें शामिल हैं:
- जम्मू-कश्मीर: पूरा केंद्रशासित प्रदेश
- हिमाचल प्रदेश: शिमला, धर्मशाला, कुल्लू-मनाली, कांगड़ा
- उत्तराखंड: देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, मसूरी, अल्मोडा, पिथोरागढ़
- उत्तर प्रदेश: सहारनपुर
- सिक्किम: गंगटोक
- पश्चिम बंगाल: दार्जिलिंग
- अरुणाचल प्रदेश: पूरा प्रदेश
- बिहार: हिमालयी रेंज से लगे उत्तरी हिस्से
🏔️ क्यों बदला गया भूकंप मैप?
पहले भारत को 4 भूकंप जोन में बांटा गया था, जो पुराने रिकॉर्ड और ऐतिहासिक एपिसेंटर पर आधारित थे। लेकिन अब विज्ञान ने इतिहास को पीछे छोड़ दिया है।
- नए कोड में Physics-Based Modeling का इस्तेमाल किया गया है।
- इसमें फॉल्ट लाइनों में जमा टेंशन और ऊर्जा का विश्लेषण किया गया है।
- इससे संभावित झटकों की ताकत और खतरे का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सका।
📊 भारत का 61% हिस्सा अब हाई रिस्क में
- BIS के नए एडिशन के अनुसार, भारत का 61% हिस्सा Medium से High Risk कैटेगरी में आता है।
- इसका मतलब है कि देश के आधे से ज्यादा हिस्से में भूकंप का खतरा पहले से अधिक गंभीर है।
- खासकर हिमालयी क्षेत्र और उसके आसपास बसे शहर लगातार खतरे के साए में हैं।
🛡️ नया सेफ्टी कोड: सिर्फ चेतावनी नहीं, रणनीति भी
नया कोड केवल खतरे की जानकारी नहीं देता, बल्कि उससे निपटने की रणनीति भी बताता है।
- नई भूकंपीय जोनिंग: पुराने 4 जोन की जगह अब 5 जोन वाला मैप।
- Zone VI सबसे गंभीर: पूरा हिमालयी आर्क अब इस कैटेगरी में।
- विज्ञान-आधारित पद्धति: Fault Lines और Physics-Based Modeling से अधिक सटीक अनुमान।
- बढ़ी सतर्कता: 61% हिस्सा अब Medium से High Risk में।
🌍 इसका असर आम लोगों पर
- निर्माण कार्यों में बदलाव: अब बिल्डिंग डिजाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर को नए कोड के अनुसार बनाना होगा।
- शहरों की सुरक्षा योजना: Zone VI में आने वाले शहरों को Disaster Preparedness बढ़ानी होगी।
- जनजागरूकता: लोगों को भूकंप सुरक्षा नियमों और Drill का पालन करना होगा।








