बिजनौर से लापता दो नाबालिग छात्राएं लुधियाना से बरामद: पुलिस की 24 दिन लंबी खोज अभियान की पूरी कहानी
बिजनौर जिले में बीते 24 दिनों से लापता दो नाबालिग छात्राओं को आखिरकार पुलिस ने लुधियाना से बरामद कर लिया। यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि सोशल मीडिया और कई शहरों में चर्चा का विषय बना रहा। दोनों छात्राएं अलग-अलग समुदाय से थीं और एक ही बालिका इंटर कॉलेज में पढ़ती थीं। 15 नवंबर को दोनों सहेलियां स्कूल जाने के लिए घर से निकलीं, लेकिन स्कूल नहीं पहुँचीं। इसके बाद शुरू हुआ एक लंबा और चुनौतीपूर्ण खोज अभियान, जिसने पुलिस को कई राज्यों और दर्जनों शहरों तक दौड़ाया।
घटना की शुरुआत
15 नवंबर की सुबह दोनों छात्राएं अपने-अपने घर से स्कूल जाने का कहकर निकलीं। लेकिन जब स्कूल से एक छात्रा के घर फोन गया कि बच्ची स्कूल नहीं आई, तब परिवार को पता चला कि वे स्कूल पहुँची ही नहीं। परिवार ने तुरंत खोजबीन शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 18 नवंबर को औपचारिक रूप से गुमशुदगी दर्ज की गई। इस घटना ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी।
पुलिस का बड़ा ऑपरेशन
एसपी अभिषेक झा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 32 पुलिस टीमों और एसओजी को खोज अभियान में लगाया। पुलिस ने 50 से अधिक शहरों और 70 से अधिक रेलवे स्टेशनों की सीसीटीवी फुटेज खंगाली। सबसे पहले दोनों छात्राएं मध्य प्रदेश के रतलाम रेलवे स्टेशन पर देखी गईं। इसके बाद पुलिस ने हरिद्वार, देहरादून, मुंबई, जयपुर, जोधपुर, ऋषिकेश सहित कई शहरों में लगातार छानबीन की।
पंजाब, हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश के रेलवे स्टेशनों पर भी फुटेज खंगाले गए। अंततः एक स्टेशन पर मिली स्पष्ट फुटेज के आधार पर पुलिस टीम लुधियाना पहुँची। वहाँ दोनों छात्राएं सुरक्षित मिलीं। वे किराए के कमरे में रह रही थीं और एक कपड़ा फैक्ट्री में नौकरी कर रही थीं, जहाँ उन्हें आठ हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा था।
सामाजिक और राजनीतिक माहौल
दोनों लड़कियों के अलग-अलग समुदाय से होने के कारण इस मामले ने सामाजिक और राजनीतिक रंग भी ले लिया। कई दिनों तक थाना शहर कोतवाली में धरना-प्रदर्शन हुआ। सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएँ और अफवाहें फैलने लगीं। माहौल गरमाने पर एसपी ने सहारनपुर से बांद्रा तक 67 रेलवे स्टेशनों पर दो-दो पुलिसकर्मियों की टीम तैनात कर दी थी।
बरामदगी और आगे की प्रक्रिया
23 दिन बाद पुलिस ने दोनों छात्राओं को लुधियाना से बरामद कर बिजनौर लाया। एसपी ने इस सफल अभियान के लिए एसओजी और पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम दिया। दोनों किशोरियों को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया है और उनके कोर्ट में बयान दर्ज कराए जा रहे हैं।
कारण और पारिवारिक पृष्ठभूमि
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों लड़कियां स्वतंत्र तरीके से जीवन जीना चाहती थीं। कक्षा नौ में पढ़ने वाली छात्रा अपने परिवार की रोक-टोक से परेशान थी, जबकि इंटर में पढ़ने वाली छात्रा का परिवार उसे आगे पढ़ाने के बजाय शादी करने पर जोर दे रहा था। इन परिस्थितियों से असंतुष्ट होकर दोनों ने घर छोड़ने का निर्णय लिया।
परिवार और समाज की प्रतिक्रिया
दोनों लड़कियों के सुरक्षित मिलने पर परिवार ने राहत की सांस ली। लंबे समय से चल रही चिंता और तनाव का अंत हुआ। समाज में भी इस घटना ने कई सवाल खड़े किए—क्या किशोरियों पर अत्यधिक दबाव और रोक-टोक उन्हें ऐसे कदम उठाने पर मजबूर कर रही है? क्या शिक्षा और स्वतंत्रता के अधिकार को लेकर परिवारों को अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है?





