संसद का शीतकालीन सत्र: सरकार के एजेंडे और विपक्ष का विरोध, बिलों पर सरकार का फोकस, महंगाई-बेरोजगारी पर विपक्ष का हमला
1 दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो चुका है। पहले ही दिन लोकसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। सरकार इस सत्र में कई अहम विधेयक पेश करने और उन्हें पारित कराने की तैयारी में है, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह राह आसान नहीं दिख रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र से पहले विपक्ष को नसीहत दी थी कि संसद में “ड्रामा नहीं, डिलिवरी चाहिए”, लेकिन विपक्ष ने इसे दरकिनार कर अपनी मांगों पर जोर दिया।
📑 सरकार किन-किन बिलों को पेश करने वाली है? इस बार सरकार का विधायी एजेंडा काफी व्यापक है। प्रमुख बिलों की सूची इस प्रकार है:
- परमाणु ऊर्जा बिल – ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए।
- उच्च शिक्षा आयोग बिल – उच्च शिक्षा संस्थानों के नियमन और गुणवत्ता सुधार हेतु।
- राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) बिल – सड़क और परिवहन नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए।
- कॉरपोरेट नियम (संशोधन) बिल – कंपनियों के संचालन और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए।
- सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल – शेयर बाजार और वित्तीय संस्थानों के नियमन को सरल बनाने के लिए।
- मणिपुर GST (संशोधन) बिल – राज्य में कर सुधार और राजस्व प्रबंधन के लिए।
- इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) बिल – दिवालियापन मामलों के समाधान को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए।
- रिपीलिंग एंड अमेंडमेंट बिल – पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को हटाने के लिए।
- आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सीलिएशन बिल – विवाद समाधान प्रक्रिया को सरल और तेज करने के लिए।
- बीमा नियम (संशोधन) बिल – बीमा क्षेत्र में सुधार और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए।
- केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) बिल – कर ढांचे में बदलाव और राजस्व बढ़ाने के लिए।
- हेल्थ सिक्योरिटी एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल – स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कर प्रावधान।
- जन विश्वास (संशोधन) बिल – छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने और व्यापारिक माहौल सुधारने के लिए।
⚡ विपक्ष क्यों कर रहा है हंगामा? कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सत्र के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि सरकार केवल अपने विधायी एजेंडे पर ध्यान दे रही है, जबकि जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही।
विपक्ष जिन मुद्दों पर जोर दे रहा है:
- एसआईआर का मुद्दा – सुरक्षा और जांच एजेंसियों से जुड़ी चिंताएं।
- दिल्ली विस्फोट और राष्ट्रीय सुरक्षा – हाल की घटनाओं के मद्देनज़र सुरक्षा पर बहस की मांग।
- वायु प्रदूषण – राजधानी और अन्य शहरों में बढ़ते प्रदूषण पर ठोस कदम।
- विदेश नीति – पड़ोसी देशों के साथ संबंधों और वैश्विक रणनीति पर चर्चा।
- किसानों की स्थिति – कृषि संकट और समर्थन मूल्य से जुड़ी समस्याएं।
- महंगाई और बेरोजगारी – आम जनता की आर्थिक कठिनाइयों पर बहस।
📅 सत्र की अवधि शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहने की संभावना है। सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष जनहित के मुद्दों पर चर्चा को प्राथमिकता देने की मांग कर रहा है।





