जोहान्सबर्ग जी-20 में पीएम मोदी का दमदार संबोधन: ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ पर जोर,

दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन का दूसरा सत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभावशाली संबोधन से खास बन गया। यह सम्मेलन पहली बार अफ्रीकी महाद्वीप पर आयोजित हुआ और इसी कारण इसका ऐतिहासिक महत्व और भी बढ़ गया। पीएम मोदी ने अपने भाषण में भारत की प्राचीन अवधारणा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया, जिसे आधुनिक संदर्भ में ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ के रूप में समझा जा सकता है। उनके संबोधन का केंद्र बिंदु समावेशी विकास, जलवायु न्याय और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना रहा।

दक्षिण अफ्रीका की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गांधी का संदर्भ

मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक महत्व से की। उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही भूमि है जहां गांधी जी ने अहिंसा और समानता का संदेश दिया था। आज वही भूमि वैश्विक एकजुटता का प्रतीक बन रही है। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि अफ्रीका में जी-20 का आयोजन ग्लोबल साउथ के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

मोदी ने यह भी याद दिलाया कि भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाई गई थी। उनके अनुसार यह निर्णय विकासशील देशों की साझा विरासत को मजबूत करता है और वैश्विक मंच पर उनकी आवाज को और बुलंद करता है।

तीन प्रमुख मुद्दों पर फोकस

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में तीन प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया:

  • समावेशी आर्थिक विकास: उन्होंने कहा कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे यूपीआई और आयुष्मान भारत मॉडल, दुनिया के लिए उदाहरण हैं। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकासशील देशों को सस्ती पूंजी और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की आवश्यकता है ताकि वे समान गति से आगे बढ़ सकें।
  • जलवायु लचीलापन और न्याय: मोदी ने जलवायु परिवर्तन को मानवता का संकट बताया, न कि केवल विकसित और विकासशील देशों का मुद्दा। उन्होंने भारत के 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य का उल्लेख किया और कहा कि ग्लोबल साउथ को जलवायु न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने लॉस एंड डैमेज फंड को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बहुपक्षीय सुधार: पीएम मोदी ने कहा कि एआई को मानवीय मूल्यों से जोड़ना होगा ताकि यह असमानता को न बढ़ाए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि ग्लोबल गवर्नेंस वास्तव में सभी का प्रतिनिधित्व कर सके।

आतंकवाद और वैश्विक चुनौतियों पर एकजुटता

मोदी ने आतंकवाद, महामारी और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे लड़ने का सबसे बड़ा हथियार वैश्विक एकजुटता है। उन्होंने भारत की अवधारणा ‘पूर्ण मानवतावाद’ को सामने रखा, जो सभी के कल्याण पर आधारित है।

उनका भाषण लगभग 15 मिनट का था, जिसमें उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और अन्य नेताओं का आभार व्यक्त किया।

सोशल मीडिया और वैश्विक प्रतिक्रिया

संबोधन के बाद सोशल मीडिया पर #ModiAtG20 तेजी से ट्रेंड करने लगा। पीएम मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया: “जोहान्सबर्ग से वैश्विक संदेश: एक परिवार, एक भविष्य।” विश्लेषकों का मानना है कि यह भाषण भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को और मजबूत करता है।

सम्मेलन 23 नवंबर तक चलेगा और अंत में डिक्लेरेशन पर अंतिम मुहर लगेगी। अमेरिकी बहिष्कार के बावजूद, मोदी की उपस्थिति ने ग्लोबल साउथ को मजबूती दी और यह संदेश दिया कि भारत विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंच पर लगातार आगे बढ़ा रहा है।

निष्कर्ष

जोहान्सबर्ग जी-20 सम्मेलन में पीएम मोदी का संबोधन केवल भारत की दृष्टि को ही नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी सामने लाता है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश आज की दुनिया में और भी प्रासंगिक हो गया है, जहां जलवायु संकट, आर्थिक असमानता और तकनीकी चुनौतियां मानवता को प्रभावित कर रही हैं। मोदी का भाषण इस बात का प्रतीक है कि भारत न केवल अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की भूमिका भी निभाने के लिए तैयार है।