पद्मनाभस्वामी मंदिर से गायब हुआ सोना बरामद: जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

तिरुवनंतपुरम, केरल — देश के सबसे समृद्ध मंदिरों में शुमार श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर से जुड़ी एक सनसनीखेज घटना ने सबका ध्यान खींचा है। मंदिर से गायब हुए सोने के सिक्के मंदिर परिसर से ही बरामद कर लिए गए हैं, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

🔍 क्या है पूरा मामला?

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के पूर्वी किले के भीतर स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में 7 से 10 मई 2025 के बीच गर्भगृह के द्वार की गोल्ड प्लेटिंग (सोने की परत चढ़ाने) के लिए स्ट्रॉन्ग रूम से 13 सोने के सिक्के निकाले गए थे। इन सिक्कों का कुल वजन लगभग 107 ग्राम था। लेकिन कुछ समय बाद मंदिर प्रशासन ने पाया कि ये सिक्के गायब हैं।

हालांकि राहत की बात यह रही कि ये सभी सिक्के बाद में मंदिर परिसर में ही मिल गए। इसके बावजूद मंदिर प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए फोर्ट थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

🕵️‍♂️ जांच में क्या खुलासा हुआ?

पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • CCTV कैमरे थे बंद: जिस समय स्ट्रॉन्ग रूम से सिक्के निकाले गए, उस समय वहां लगे CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे थे। यह सुरक्षा में बड़ी चूक मानी जा रही है।
  • पॉलीग्राफ टेस्ट की मंजूरी: पुलिस ने मंदिर के छह कर्मचारियों पर पॉलीग्राफ (Lie Detector) टेस्ट कराने के लिए तिरुवनंतपुरम न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अदालत से अनुमति मांगी थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
  • चोरी या लापरवाही? पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह घटना सुनियोजित चोरी की कोशिश थी या फिर प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि भले ही पॉलीग्राफ टेस्ट अदालत में वैध साक्ष्य न माने जाएं, लेकिन इससे कर्मचारियों के बयानों में विरोधाभासों की पहचान कर मामले की तह तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

🏛️ श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर: एक परिचय

  • यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जहां वे आनंत शेष (सर्प) पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं।
  • यह मंदिर केरल और द्रविड़ वास्तुकला का अद्भुत संगम है।
  • सबरीमला अयप्पा मंदिर के बाद, यह मंदिर दुनिया के सबसे धनी मंदिरों में गिना जाता है। इसके तहखानों में छिपे खजाने की कहानियाँ विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।

यह घटना न केवल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि धार्मिक स्थलों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए और अधिक सतर्कता और पारदर्शिता की आवश्यकता है।