दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ इंडिया गेट पर जनसैलाब, पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली इस समय गंभीर वायु प्रदूषण संकट से जूझ रही है। जहरीली हवा ने जनजीवन को प्रभावित किया है, और इसी के विरोध में आज सैकड़ों नागरिकों ने इंडिया गेट पर एकत्र होकर सरकार से तत्काल और ठोस कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार न केवल प्रदूषण नियंत्रण में विफल रही है, बल्कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के वास्तविक आंकड़े भी छिपा रही है।

🚨 सुरक्षा के मद्देनज़र इंडिया गेट क्षेत्र सील, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में

प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के आसपास के इलाके को पूरी तरह बंद कर दिया। पुलिस ने बिना अनुमति के प्रदर्शन करने के आरोप में कई लोगों को हिरासत में लिया। डीसीपी (नई दिल्ली) देवेश कुमार महला ने स्पष्ट किया, “इंडिया गेट पर विरोध की अनुमति नहीं थी। केवल जंतर-मंतर को ही नामित विरोध स्थल माना गया है, जहां उचित प्रक्रिया के तहत प्रदर्शन की अनुमति ली जा सकती है।”

👩‍👧 महिलाएं और बच्चे भी शामिल, भावनात्मक अपील के साथ उठी आवाज़

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए। पर्यावरण कार्यकर्ता भावरीन खंडारी ने कहा, “हम अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से मिलना चाहते हैं। हमने मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा था, लेकिन हमें मना कर दिया गया।” उन्होंने चेताया कि “हर तीसरे बच्चे के फेफड़े प्रदूषण से प्रभावित हो चुके हैं। ये बच्चे स्वच्छ हवा में पले-बढ़े बच्चों की तुलना में लगभग 10 साल कम जीवन जी पाएंगे।”

🗣️ नागरिकों का आरोप: सरकार ने छीना स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार

प्रदर्शनकारी अभिषेक ने कहा, “सरकार नागरिकों को स्वच्छ हवा में सांस लेने का बुनियादी अधिकार देने में असफल रही है। एक समय था जब दिल्ली को हरित राजधानी कहा जाता था, लेकिन आज यह दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है। नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं दे रहा।”

📉 AQI डेटा पर सवाल, सरकार की पारदर्शिता पर उठे प्रश्न

प्रदर्शनकारियों का सबसे बड़ा आरोप यह था कि दिल्ली सरकार प्रदूषण के वास्तविक स्तर को छिपा रही है। उनका कहना है कि सरकारी AQI आंकड़े वास्तविकता से काफी कम दिखाए जा रहे हैं, जिससे जनता को भ्रमित किया जा रहा है और समस्या की गंभीरता को कमतर आंका जा रहा है।

यह विरोध न केवल प्रदूषण के खिलाफ एक जनआंदोलन था, बल्कि यह नागरिकों की उस पीड़ा और चिंता का प्रतीक भी है जो वे हर सांस के साथ महसूस कर रहे हैं। क्या सरकार अब जागेगी और ठोस कदम उठाएगी? यह सवाल अब हर दिल्लीवासी के मन में है।