बिहार चुनाव 2025: पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें 64.69% वोटिंग दर्ज की गई — जो कि 2020 के मुकाबले 7.47% अधिक है। यह इजाफा हर सीट पर देखा गया, यानी 121 में से एक भी सीट ऐसी नहीं रही जहां वोटिंग घटी हो।
📊 वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोतरी: सीटवार विश्लेषण
🔴 सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वाली सीटें (10% से अधिक इजाफा)
| सीट | 2020 वोटिंग % | 2025 वोटिंग % | इजाफा |
|---|---|---|---|
| कल्याणपुर | 57.93 | 73.62 | 15.69% |
| सोनबरसा | 53.73 | 68.3 | 14.57% |
| मोहिउद्दीननगर | 56.02 | 70.4 | 14.38% |
| जमालपुर | 46.61 | 60.89 | 14.28% |
| मुंगेर | 48.73 | 61.94 | 13.21% |
| सरायरंजन | 60.86 | 73.33 | 12.47% |
| लखीसराय | 52.78 | 63.46 | 10.68% |
| राघोपुर | 58.03 | 68.54 | 10.51% |
इनमें कई सीटें मंत्रियों और बड़े नेताओं की हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी ने वोटिंग को प्रभावित किया।
🟠 मध्यम बढ़ोतरी वाली सीटें (5% से 10% इजाफा)
इनमें 72 सीटें शामिल हैं, जैसे:
- मोकामा (अनंत सिंह): 9.99%
- छपरा (खेसारी लाल यादव): 7.62%
- मनेर (भाई वीरेंद्र): 6.76%
- सीवान (मंत्री मंडल पांडेय): 5.28%
- महुआ (तेज प्रताप यादव): 8.5%
यह श्रेणी दर्शाती है कि जनता का उत्साह पूरे राज्य में फैला हुआ है, न कि सिर्फ चुनिंदा क्षेत्रों में।
🟢 कम बढ़ोतरी वाली सीटें (5% से कम इजाफा)
सिर्फ 7 सीटें ऐसी रहीं जहां इजाफा 5% से कम रहा:
- अलीनगर (मैथिली ठाकुर): 2.78%
- कुम्हरार: 4.32%
- दीघा: 4.41%
- दरभंगा: 4.14%
इन सीटों पर कम मतदान के पीछे शहरी उदासीनता, कम प्रचार या स्थानीय मुद्दों की कमी हो सकती है।
🏆 सबसे ज्यादा और सबसे कम मतदान
- सबसे ज्यादा: मीनापुर — 77.62%
- सबसे कम: कुम्हरार — 39.59%
यह अंतर दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान का उत्साह शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक रहा।
🔍 राजनीतिक संकेत और विश्लेषण
- एनडीए इसे जनता का विश्वास बता रही है।
- महागठबंधन इसे बदलाव की लहर मान रहा है।
- चिराग पासवान ने दावा किया कि एनडीए पहले चरण में 100 सीटें जीत सकती है।
यह बढ़ा हुआ मतदान राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है, खासकर उन सीटों पर जहां पिछली बार जीत का अंतर कम था।
📌 निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 के पहले चरण में:
- हर सीट पर वोटिंग बढ़ी है — यह लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।
- बड़े नेताओं की सीटों पर अधिक मतदान हुआ, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
- ग्रामीण क्षेत्रों ने शहरी क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा भागीदारी दिखाई।





