उत्तराखंड की रजत जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ऐतिहासिक दौरा
उत्तराखंड राज्य की स्थापना को 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रजत जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन दिवसीय दौरे के तहत राज्य के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया और कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लिया।
🏞️ उत्तराखंड की रजत जयंती: एक गौरवशाली पड़ाव
- उत्तराखंड की स्थापना 9 नवंबर 2000 को हुई थी।
- 2025 में राज्य ने अपने 25 वर्षों की यात्रा पूरी की, जिसे रजत जयंती के रूप में मनाया जा रहा है।
- इस अवसर पर राज्य सरकार ने सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू की।
🎓 पतंजलि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह
- हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में आयोजित पतंजलि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
- उन्होंने विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए और शिक्षा के साथ योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला।
- राष्ट्रपति ने कहा कि “शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को दिशा देने का साधन है।”
🗣️ राष्ट्रपति का प्रेरणादायक संबोधन
- उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे आधुनिक विज्ञान के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान को भी अपनाएं।
- योग और आयुर्वेद को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के लिए पतंजलि विश्वविद्यालय की सराहना की।
- उन्होंने कहा कि “भारत की आत्मा उसकी संस्कृति में है, और शिक्षा का उद्देश्य उस आत्मा को जागृत करना होना चाहिए।”
🏛️ अन्य कार्यक्रम और दौरे
- राष्ट्रपति ने देहरादून में उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र को भी संबोधित किया।
- उन्होंने राज्य की उपलब्धियों की सराहना की और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
- नैनीताल और मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों पर भी उनका दौरा हुआ, जहां उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर बल दिया।
🌿 संस्कृति, सेवा और समर्पण का संदेश
- राष्ट्रपति मुर्मू ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, लोक संस्कृति और जनसेवा की भावना की प्रशंसा की।
- उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड न केवल देवभूमि है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र भी है।”








