पूर्वोत्तर भारत में वायुसेना का रणनीतिक अभ्यास
भारतीय वायुसेना ने पूर्वोत्तर भारत में छह अलग-अलग तिथियों पर व्यापक सैन्य अभ्यास की योजना बनाई है। इसके लिए Notice to Airmen (NOTAM) जारी किया गया है, जो वायु क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंधों की सूचना देता है। ये अभ्यास 6 नवंबर, 20 नवंबर, 4 दिसंबर, 18 दिसंबर, 1 जनवरी और 15 जनवरी को होंगे।
इस दौरान वायुसेना चीन, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश से सटी सीमाओं के पास युद्धाभ्यास करेगी। अभ्यास में अग्रिम हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों से समन्वित उड़ानें, युद्ध प्रशिक्षण और रसद संचालन शामिल होंगे। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, और इन अभ्यासों का उद्देश्य भारत की हवाई क्षमता और क्षेत्रीय प्रभुत्व को मजबूत करना है
🛩️ ‘वायु समन्वय-II’ अभ्यास: ड्रोन युद्ध की तैयारी
हाल ही में भारतीय सेना ने रेगिस्तानी इलाके में ‘वायु समन्वय-II’ नामक अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह दक्षिणी कमान के अंतर्गत आयोजित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य था ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीकों को चुनौतीपूर्ण युद्ध परिस्थितियों में परखना।
इस अभ्यास में थल और वायु सेना के संसाधनों के बीच तालमेल का प्रदर्शन किया गया। यह अभ्यास भारत की स्वदेशी तकनीकों, अनमैन्ड सिस्टम्स और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस में बढ़ती दक्षता को दर्शाता है, साथ ही यह डॉक्ट्रिनल वैलिडेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
🔱 ‘अभ्यास त्रिशूल’: त्रि-सेवा युद्धाभ्यास पश्चिमी सीमा पर
भारत ने हाल ही में ‘अभ्यास त्रिशूल’ नामक 12-दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है, जो थल, वायु और नौसेना की भागीदारी वाला एक बड़ा युद्धाभ्यास है। यह अभ्यास गुजरात और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कच्छ क्षेत्र को विशेष रूप से रणनीतिक फोकस के रूप में चुना गया है।
इस अभ्यास में विशेष बल, मिसाइल इकाइयाँ, युद्धपोत, टैंक और राफेल व सुखोई Su-30 जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसका उद्देश्य दक्षिणी पाकिस्तान को लक्ष्य बनाकर आक्रामक युद्ध परिदृश्य का अभ्यास करना है, जिससे ऑपरेशन सिंदूर के बाद की रणनीतिक स्थिति में भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त युद्ध तत्परता का मूल्यांकन किया जा सके।





