भारत-आसियान संबंधों पर पीएम मोदी का दृष्टिकोण: “21वीं सदी भारत और आसियान की सदी”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलेशिया में आयोजित आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वर्चुअल रूप से भाग लिया और क्षेत्रीय सहयोग को लेकर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत और आसियान मिलकर विश्व की लगभग एक चौथाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और दोनों साझेदार न केवल भौगोलिक रूप से, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।

🔹 भारत की एक्ट ईस्ट नीति और आसियान की भूमिका

पीएम मोदी ने आसियान को भारत की एक्ट ईस्ट नीति का केंद्रीय स्तंभ बताया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आसियान के दृष्टिकोण को भारत का पूर्ण समर्थन देने की बात कही।

🔹 रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक स्थिरता

उन्होंने कहा कि अनिश्चितताओं के बावजूद भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी में निरंतर प्रगति हो रही है, जो वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए एक मजबूत आधार बन रही है। इस वर्ष की थीम “समावेशिता और सततता” को उन्होंने डिजिटल समावेशन, खाद्य सुरक्षा और लचीली आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में साझा प्रयासों से जुड़ा बताया।

🔹 सहयोग के नए आयाम

भारत ने 2026 को “आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष” घोषित करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही शिक्षा, पर्यटन, विज्ञान एवं तकनीक, खेल, हरित ऊर्जा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

🔹 साझा विरासत और भविष्य की दिशा

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हर आपदा में अपने आसियान मित्रों के साथ खड़ा रहा है और दोनों पक्षों के बीच पीपुल-टू-पीपुल संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि “आसियान कम्युनिटी विजन 2045” और “विकसित भारत 2047” मिलकर मानवता के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करेंगे।