“परिवार की राजनीति नहीं, बिहार की तरक्की चाहिए!” : नीतीश कुमार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार अभियान में राजनीतिक बयानबाज़ी अपने चरम पर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में एक जनसभा के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “कुछ लोग सिर्फ अपने परिवार के लिए काम करते हैं।” यह बयान न केवल चुनावी माहौल को गर्म कर गया, बल्कि महागठबंधन की राजनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए।

नीतीश कुमार ने गोपालगंज और वैशाली में आयोजित जनसभाओं में कहा कि लालू यादव ने जब खुद पद छोड़ना पड़ा, तो अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजद की राजनीति परिवारवाद पर आधारित है, जहां पार्टी की प्राथमिकता जनता नहीं बल्कि परिवार के सदस्यों को सत्ता में बनाए रखना है News18 हिंदी ABP News

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में ऐसा कोई चलन नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जेडीयू में कोई भी व्यक्ति सिर्फ अपने परिवार के दम पर नेता नहीं बनता, बल्कि कार्य और सेवा के आधार पर आगे बढ़ता है। नीतीश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी अपने परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में नहीं उतारा, जबकि राजद में यह परंपरा रही है कि सत्ता का हस्तांतरण परिवार के भीतर ही होता है।

नीतीश कुमार के इस बयान को राजद और महागठबंधन के भीतर चल रही खींचतान के संदर्भ में देखा जा रहा है। हाल ही में तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है, जबकि कांग्रेस को डिप्टी सीएम पद तक नहीं मिला। इससे कांग्रेस के भीतर असंतोष की लहर दौड़ गई है और पार्टी कार्यकर्ता टिकट वितरण को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

नीतीश कुमार ने अपने भाषणों में यह भी कहा कि बिहार की जनता अब समझदार हो गई है और वह ऐसे नेताओं को पसंद नहीं करती जो सिर्फ अपने परिवार को आगे बढ़ाने के लिए राजनीति करते हैं। उन्होंने राजद के 15 साल के शासन को याद दिलाते हुए कहा कि उस दौर में विकास की गति थम गई थी और भ्रष्टाचार चरम पर था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह बयान रणनीतिक रूप से दिया गया है ताकि राजद के परिवारवाद के मुद्दे को चुनावी बहस का केंद्र बनाया जा सके। इससे न केवल राजद की छवि को नुकसान पहुंच सकता है, बल्कि एनडीए को एक नैतिक बढ़त भी मिल सकती है।

बहरहाल, बिहार चुनाव 2025 में परिवारवाद बनाम विकासवाद की बहस तेज हो गई है। नीतीश कुमार के इस बयान ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी रणभूमि में व्यक्तिगत हमले और वैचारिक टकराव दोनों ही प्रमुख हथियार बने हुए हैं।

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