ईडी की जांच में उजागर हुआ भ्रष्टाचार का संगठित नेटवर्क: मंत्री से लेकर ठेकेदार तक शामिल

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में झारखंड सरकार के ग्रामीण निर्माण विभाग में एक संगठित भ्रष्टाचार गिरोह का खुलासा हुआ है। इस नेटवर्क में मंत्री, मुख्य अभियंता, निजी सहायक (पीए) और ठेकेदारों की मिलीभगत सामने आई है, जो सरकारी टेंडरों में कमीशन वसूली और अवैध धन के प्रबंधन में सक्रिय थे।

जांच के अनुसार, विभाग में भ्रष्टाचार की कोई एक-दो isolated घटनाएं नहीं थीं, बल्कि एक पूरा ‘सिंडिकेट’ काम कर रहा था। टेंडर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के स्टाफ द्वारा तयशुदा कमीशन वसूला जाता था, जो बाद में उच्च पदस्थ लोगों तक पहुंचता था।

इस गिरोह के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—अवैध नकदी को वैध रूप में बदलना। इसके लिए आरोपियों ने दिल्ली स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और एंट्री ऑपरेटरों के एक नेटवर्क का सहारा लिया। इस नेटवर्क के माध्यम से काले धन को सफेद किया गया, जिससे भ्रष्टाचार की रकम को वैध वित्तीय प्रणाली में शामिल किया जा सके।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में कई सहयोगी माध्यम शामिल थे, जो नकदी के प्रवाह और वैधता सुनिश्चित करने में मदद करते थे। यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है, बल्कि सरकारी तंत्र में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार की गंभीरता को भी उजागर करता है।