बिजनौर में गंगा और खो नदी का उफान: खतरे के निशान के करीब जलस्तर
पहाड़ों पर भारी बारिश से बिजनौर की गंगा और खो नदी उफान पर, खतरे का निशान पार करने की आशंका
बिजनौर जनपद में पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार और तेज बारिश का सीधा असर गंगा और अन्य नदियों पर देखने को मिल रहा है। गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। वहीं, खो नदी ने इस साल अपने सबसे ऊँचे स्तर को छूते हुए लगभग 73,000 क्यूसेक के बहाव को दर्ज किया है।
गंगा का उफान ग्रामीणों और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। नदी का बहाव तेज होने से खादर क्षेत्र और तटीय गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। खेतों में पानी भरने की आशंका के साथ-साथ ग्रामीणों को अपने घरों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी करनी पड़ रही है।
खो नदी का रिकॉर्ड बहाव
खो नदी का जलस्तर इस वर्ष अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। 73,000 क्यूसेक का बहाव नदी के उफान की गंभीरता को दर्शाता है। इससे आसपास के गांवों में पानी घुसने की संभावना बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
प्रशासनिक सतर्कता
प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखा है। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और स्थानीय प्रशासन लगातार गंगा व खो नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।
ग्रामीणों की चिंता
गंगा और खो नदी के उफान से प्रभावित क्षेत्रों के लोग पहले से ही सतर्क हो गए हैं। कई परिवारों ने अपने जरूरी सामान और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में उन्हें बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार जलस्तर का तेजी से बढ़ना अधिक चिंताजनक है।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश का असर मैदानी इलाकों पर भी पड़ रहा है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो गंगा और खो नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को और अधिक सतर्क रहना होगा।









