मुरादाबाद मैनाठेर कांड: 15 साल बाद अदालत का ऐतिहासिक फैसला, 16 दोषियों को उम्रकैद

मुरादाबाद जिले के 15 साल पुराने बहुचर्चित मैनाठेर कांड में शनिवार को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे-दो कृष्ण कुमार की अदालत ने तत्कालीन डीआईजी पर जानलेवा हमला करने, सरकारी पिस्टल लूटने और पुलिस चौकी में आगजनी के मामले को जघन्य श्रेणी का अपराध मानते हुए दोषियों पर भारी जुर्माना भी लगाया है। फैसले के तुरंत बाद कड़ी सुरक्षा के बीच सभी दोषियों को जेल भेज दिया गया।

यह मामला 6 जुलाई 2011 का है, जब थाना मैनाठेर अंतर्गत असालतनगर बघा गांव में छेड़छाड़ के एक आरोपी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया था देखते ही देखते हिंसा भड़क उठी और उग्र भीड़ ने मुरादाबाद-संभल मार्ग पर जाम लगा दिया था हालात काबू करने पहुंचे तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार और उनकी टीम को उपद्रवियों ने घेर लिया था भीड़ पर डीआईजी को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटने और सरकारी पिस्टल लूट लिए जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगे थे इतना ही नहीं पथराव और फायरिंग के दौरान डीआईजी को गोली भी लगी थी, इस भीषण बवाल में 18 अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे और डींगरपुर पुलिस चौकी सहित कई सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 23 मार्च को अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था, जबकि दो अन्य फरार चल रहे दोषियों को पुलिस ने हाल ही में गिरफ्तार किया था याद दिला दे कि 16 आरोपियों में चार आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है
शनिवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों और सबूतों को सही मानते हुए मंजूर अहमद, मोहम्मद अली, हाशिम, मोहम्मद कमरुल, मोहम्मद मुजीफ, मोहम्मद यूनुस, रिजवान, अम्बरीश, कासिम, मोबीन, मोहम्मद मुजीब, तहजीब आलम, जाने आलम, फिरोज, नाजिम और परवेज आलम को उम्रकैद की सजा सुनाई।
इस दौरान पुलिस की जानिब से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे सुरक्षा व्यवस्था की कमान स्वयं एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह संभाले हुए थे सिविल पुलिस के साथ-साथ पुलिस बल की भी तैनाती की गई थी जिस दौरान अदालत में बहस चल रही थी उस समय किसी को भी अदालत में जाने की इजाजत नहीं थी जिस कारण वादकारियों को बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ा अदालत का फैसला आ जाने के बाद जब दोषियों को वाहन में बैठाकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत परिसर से जेल ले जाया गया तब कहीं जाकर वादकारियों को अदालत में जाने की इजाजत मिली |