NHAI का अनोखा प्लान: हाईवे किनारे बनेगा ‘बी कॉरिडोर’, नीम, करंज और महुआ की कतारें सजाएँगी हाईवे
भारत में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने एक अनोखी पहल शुरू की है। अब राष्ट्रीय राजमार्ग सिर्फ तेज़ रफ्तार गाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने की दिशा में भी जाने जाएंगे। इस योजना के तहत हाईवे किनारे ‘बी कॉरिडोर’ विकसित किए जाएंगे, जिनमें ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे जो मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं के लिए लाभकारी हों।
बी कॉरिडोर क्या है?
- यह एक हरित पट्टी होगी जिसमें फूलदार पेड़-पौधे लगाए जाएंगे।
- इन पौधों में सालभर अलग-अलग मौसम में फूल खिलेंगे।
- मधुमक्खियों को लगातार रस और पराग मिलेगा, जिससे उनकी संख्या और सेहत बेहतर होगी।
- परागण की प्रक्रिया मजबूत होगी और खेती की पैदावार बढ़ेगी।
कौन-कौन से पेड़ लगाए जाएंगे?
NHAI ने इस योजना में देशी और पर्यावरण-अनुकूल पेड़ों को चुना है:
- नीम
- करंज
- महुआ
- पलाश
- बॉटल ब्रश
- जामुन
- सिरिस
इसके अलावा झाड़ियां, जड़ी-बूटियां और घास भी लगाई जाएंगी। सूखी लकड़ी और खोखले पेड़ों के तनों को हटाया नहीं जाएगा ताकि मधुमक्खियों और अन्य जीवों को रहने की जगह मिल सके।
हर 500 मीटर पर हरित क्लस्टर
- हाईवे के किनारे हर 500 मीटर से 1 किलोमीटर पर फूलदार पेड़ों के क्लस्टर बनाए जाएंगे।
- यह दूरी मधुमक्खियों की औसत भोजन खोजने की सीमा के अनुरूप रखी गई है।
- वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 40 लाख पेड़ लगाए जाएंगे, जिनमें से 60% बी कॉरिडोर के तहत होंगे।
- प्रत्येक फील्ड ऑफिस को कम से कम तीन कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य दिया गया है।
पर्यावरण और कृषि को लाभ
- मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं की संख्या बढ़ेगी।
- फसलों में बेहतर परागण होगा, जिससे पैदावार बढ़ेगी।
- जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा।
- हाईवे का सौंदर्यीकरण भी होगा और यात्रियों को हरियाली का अनुभव मिलेगा।








