राष्ट्रपति मैक्रों का भारत दौरा: रक्षा और तकनीकी सहयोग में नई ऊंचाई
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे हैं। मुंबई आगमन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी ने लिखा कि यह यात्रा भारत-फ्रांस सहयोग को और मजबूत करेगी और वैश्विक प्रगति में योगदान देगी। मैक्रों ने भी विमान से भारत की ओर आते हुए तस्वीर साझा कर कहा कि वे इस यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देंगे।
चौथी भारत यात्रा और रणनीतिक महत्व
2017 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद मैक्रों की यह चौथी भारत यात्रा है। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को गहराई देने का अवसर है, बल्कि रक्षा, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग के नए आयाम भी खोल सकता है। भारत और फ्रांस लंबे समय से रक्षा साझेदार रहे हैं और इस यात्रा में उस सहयोग को और व्यापक बनाने की उम्मीद है।
राफेल डील पर संभावित मुहर
इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित डील है। रक्षा मंत्रालय और रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में इस खरीद को मंजूरी दी है। लगभग ₹3.60 लाख करोड़ की इस मेगा डील के तहत अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जो मेक इन इंडिया पहल को मजबूती देगा। यह सौदा भारत की वायुसेना की क्षमता को नई दिशा देगा और फ्रांस के साथ रक्षा सहयोग को ऐतिहासिक स्तर पर ले जाएगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा
नई दिल्ली में चल रहे India AI Impact Summit 2026 के मद्देनजर दोनों नेता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी गहन चर्चा करेंगे। उम्मीद है कि मैक्रों इस सम्मेलन में शामिल होकर भारत और फ्रांस के बीच डिजिटल नवाचार और एआई रिसर्च को बढ़ावा देंगे। यह सहयोग न केवल तकनीकी क्षेत्र में बल्कि औद्योगिक और आर्थिक साझेदारी में भी नई संभावनाएं खोलेगा।
आर्थिक और औद्योगिक सहयोग
मैक्रों के साथ आए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख व्यापारिक नेता और डिजिटल क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं। जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने पहले ही द्विपक्षीय व्यापार को नई गति दी है। इस दौरे से रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होने की संभावना है।
राष्ट्रपति मैक्रों का यह दौरा भारत-फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला साबित हो सकता है। राफेल डील और एआई सहयोग इस यात्रा के दो प्रमुख स्तंभ हैं, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगे। मुंबई और दिल्ली में होने वाली बैठकों से यह स्पष्ट है कि भारत और फ्रांस केवल रक्षा साझेदार नहीं, बल्कि वैश्विक प्रगति के लिए एक साझा दृष्टिकोण रखने वाले सहयोगी भी हैं।






