“अमेरिका से दूरी, भारत संग EU की नई रणनीतिक साझेदारी”

दुनिया में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात ने यूरोपीय संघ (EU) को अपनी विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। लंबे समय तक अमेरिका को अपना सबसे बड़ा सहयोगी मानने वाला यूरोपीय संघ अब एशिया की ओर रुख कर रहा है। हाल ही में यूरोपीय संघ की उपाध्यक्ष ने भारत के साथ एक बड़ी रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी की घोषणा की है। यह कदम न केवल अमेरिका से दूरी बनाने का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत वैश्विक शक्ति संतुलन में एक अहम भूमिका निभा रहा है।

अमेरिका से मोहभंग क्यों?

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं।

  • रक्षा और सुरक्षा: अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति ने यूरोपीय देशों को असुरक्षित महसूस कराया।
  • व्यापारिक विवाद: यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच व्यापारिक करों और प्रतिबंधों को लेकर तनाव बढ़ा।
  • जलवायु परिवर्तन: अमेरिका की नीतियों ने कई बार यूरोपीय संघ को निराश किया, जबकि EU इस मुद्दे पर गंभीर है।
  • यूक्रेन संकट: रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की प्राथमिकताएँ और यूरोप की चिंताएँ हमेशा एक जैसी नहीं रहीं।

इन परिस्थितियों ने यूरोपीय संघ को यह सोचने पर मजबूर किया कि उसे अपनी सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी के लिए नए विकल्प तलाशने होंगे।

भारत क्यों बना भरोसेमंद साझेदार?

भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और वैश्विक राजनीति में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

  • लोकतांत्रिक ढांचा: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जो यूरोपीय संघ के मूल्यों से मेल खाता है।
  • आर्थिक शक्ति: भारत की डिजिटल और औद्योगिक प्रगति ने उसे निवेश और व्यापार का केंद्र बना दिया है।
  • सुरक्षा सहयोग: भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा का अहम स्तंभ है।
  • कूटनीतिक संतुलन: भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है, जो EU के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

पीएम मोदी के नेतृत्व पर भरोसा

यूरोपीय संघ की उपाध्यक्ष ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। मोदी सरकार ने पिछले वर्षों में भारत की वैश्विक छवि को मजबूत किया है।

  • विदेश नीति: भारत ने “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना के साथ वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दिया।
  • आर्थिक सुधार: मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं ने भारत को निवेश का आकर्षण बनाया।
  • सुरक्षा दृष्टिकोण: आतंकवाद और सीमा सुरक्षा पर भारत का सख्त रुख यूरोपीय संघ को भरोसा दिलाता है।

साझेदारी का महत्व

भारत और यूरोपीय संघ की यह नई साझेदारी कई क्षेत्रों में असर डालेगी:

  • रक्षा सहयोग: संयुक्त सैन्य अभ्यास और तकनीकी सहयोग।
  • व्यापारिक समझौते: मुक्त व्यापार समझौते से दोनों पक्षों को आर्थिक लाभ।
  • ऊर्जा और जलवायु: नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण में संयुक्त प्रयास।
  • डिजिटल सहयोग: साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार में साझेदारी।

निष्कर्ष

यूरोपीय संघ का यह कदम वैश्विक राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। अमेरिका से दूरी बनाकर भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी करना इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में भारत विश्व राजनीति का केंद्र बनेगा। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने जिस तरह से अपनी वैश्विक पहचान बनाई है, वह यूरोपीय संघ के लिए भरोसे का कारण है।

यह साझेदारी न केवल भारत और यूरोप के लिए लाभकारी होगी, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी नया आयाम देगी।