ट्रंप ने दावोस में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की शुरुआत, पाकिस्तान समेत 20 देशों ने किया हस्ताक्षर

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय शांति पहल “बोर्ड ऑफ पीस” का औपचारिक उद्घाटन किया। यह निकाय मूल रूप से गाजा युद्धविराम और पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक व्यापक मंच के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

उद्घाटन भाषण

ट्रंप ने समारोह में कहा कि “हर कोई इस बोर्ड का हिस्सा बनना चाहता है।” उन्होंने इसे “बहुत रोमांचक दिन” बताते हुए दावा किया कि बोर्ड पहले से ही सक्रिय है और संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य संगठनों के साथ मिलकर काम करेगा।

हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख नेता

इस चार्टर पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं:

  • अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई
  • इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो
  • पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना
  • उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्ज़ियोयेव
  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
  • आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान
  • अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव

सदस्यता और संरचना

  • बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का शुल्क तय किया गया है।
  • ट्रंप ने स्वयं को बोर्ड का अध्यक्ष घोषित किया है, जिसे वे जीवनभर संभाल सकते हैं।
  • फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और जारेड कुश्नर शामिल हैं।

समर्थन और विरोध

  • समर्थन करने वाले देशों में पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया और अन्य मुस्लिम-बहुल राष्ट्र शामिल हैं।
  • यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन ने इसमें शामिल होने से इनकार किया है।
  • चीन ने स्पष्ट रूप से दूरी बना ली है, जबकि रूस और यूक्रेन ने अभी निर्णय नहीं लिया है।
  • भारत ने भी हस्ताक्षर नहीं किए।

विवाद और आलोचना

कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के कार्यों को चुनौती दे सकता है। फ्रांस और ब्रिटेन ने रूस की संभावित भागीदारी पर चिंता जताई है। वहीं ट्रंप का कहना है कि वे “सभी शक्तिशाली लोगों” को शामिल करना चाहते हैं, चाहे वे विवादास्पद ही क्यों न हों।

वर्तमान स्थिति

एनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार अब तक लगभग 35 देश इस परियोजना में शामिल होने पर सहमत हो चुके हैं, जबकि करीब 60 देशों को आमंत्रित किया गया था। बोर्ड की सफलता गाजा युद्धविराम की स्थिरता और अन्य वैश्विक संघर्षों पर होने वाली वार्ताओं पर निर्भर करेगी।