जांच के जाल में उलझी फर्जी डॉक्टर की गुत्थी
बिजनौर। जिला अस्पताल में फर्जी डॉक्टर प्रकरण की गुत्थी सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। बुधवार को इस मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय कमेटी के सामने चिकित्सकों के बयान दर्ज किए गए।
जांच के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब डॉ. तुषार ने कमेटी के सामने फर्जी डॉक्टर को पहचानने से ही साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह व्यक्ति उनके साथ कभी कार्यरत नहीं रहा। जबकि, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में डॉ. तुषार स्वयं फोन पर उस फर्जी डॉक्टर दिनेश को अपना असिस्टेंट बताते हुए सुने जा रहे हैं।
इस विरोधाभासी बयान ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सच्चाई क्या है—क्या डॉक्टर तुषार दबाव में बयान बदल रहे हैं या फिर वायरल वीडियो की सच्चाई पर ही संदेह है।
कमेटी ने इस विरोधाभास को गंभीरता से लिया है और मामले की तह तक जाने के लिए अतिरिक्त साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अस्पताल प्रशासन भी इस घटना से असहज है क्योंकि इससे न केवल अस्पताल की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आमजन यह जानना चाहते हैं कि आखिर जिला अस्पताल में बिना योग्यता और पहचान के कोई व्यक्ति डॉक्टर की भूमिका कैसे निभा रहा था।
मुख्य बिंदु
- तीन सदस्यीय कमेटी के सामने बयान दर्ज।
- डॉ. तुषार ने फर्जी डॉक्टर को पहचानने से किया इन्कार।
- वायरल वीडियो में दिनेश को असिस्टेंट बताते हुए सुने गए।
- जांच और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज।







