दिल्ली की हवा में जहर: प्रयास नाकाम, हालात बदतर

दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा की गिरफ्त में है। राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 400 के पार बना हुआ है, जो “गंभीर” श्रेणी में आता है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है बल्कि जनजीवन और यातायात व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है। प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो रहा है और लोगों को धुंध और स्मॉग की मोटी परत के बीच सांस लेना पड़ रहा है।

🚦 यातायात पर असर

  • दिल्ली की सड़कों पर दृश्यता बेहद कम हो गई है। मोटी स्मॉग की परत के कारण वाहन चालकों को हेडलाइट्स जलाकर दिन में भी चलना पड़ रहा है।
  • कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है क्योंकि वाहन धीमी गति से चल रहे हैं।
  • हवाई यातायात पर भी इसका असर पड़ा है। कई फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई हैं जबकि दर्जनों उड़ानें घंटों की देरी से चल रही हैं।
  • रेलवे सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों पीछे चल रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

🏥 स्वास्थ्य पर खतरा

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार दिल्ली की हवा “गंभीर” श्रेणी में है। इसका मतलब है कि यह हवा सांस लेने योग्य नहीं है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
  • डॉक्टरों का कहना है कि इस स्तर का प्रदूषण अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों को बढ़ा सकता है।
  • बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है। स्कूल जाने वाले बच्चों को लगातार खांसी और आंखों में जलन की शिकायत हो रही है।
  • अस्पतालों में सांस की तकलीफ और एलर्जी से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

🏛 प्रशासनिक प्रयास और विफलता

  • दिल्ली सरकार और प्रशासन ने प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें निर्माण कार्यों पर रोक, पानी का छिड़काव, और वाहनों पर नियंत्रण जैसे उपाय शामिल हैं।
  • “ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान” (GRAP) के तहत कई सख्त कदम उठाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है।
  • पराली जलाने की समस्या अब भी बनी हुई है। पंजाब और हरियाणा से आने वाला धुआं दिल्ली की हवा को और जहरीला बना रहा है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय प्रदूषण स्रोतों जैसे वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक धुआं और धूल भी इस संकट को बढ़ा रहे हैं।

🌍 नागरिकों की मुश्किलें

  • लोग मास्क पहनकर घर से बाहर निकल रहे हैं, लेकिन यह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
  • कई कंपनियों ने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी है ताकि उन्हें जहरीली हवा में बाहर न निकलना पड़े।
  • स्कूलों में छुट्टियां बढ़ाई जा रही हैं या ऑनलाइन क्लासेस का विकल्प दिया जा रहा है।
  • आम नागरिकों में गुस्सा और निराशा है क्योंकि हर साल सर्दियों में यही स्थिति दोहराई जाती है और स्थायी समाधान नजर नहीं आता।

🔎 विशेषज्ञों की राय

  • पर्यावरणविदों का कहना है कि दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए केवल अल्पकालिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
  • दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है जिसमें स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, और औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण शामिल हो।
  • नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी, जैसे निजी वाहनों का कम इस्तेमाल और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचना।