दिल्ली ब्लास्ट के बाद पीएम मोदी और नेतन्याहू की पहली फोन वार्ता , जल्द मुलाकात: आतंकवाद पर सख्त रुख, पाकिस्तान में बेचैनी

दिल्ली में हाल ही में हुए ब्लास्ट ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर कर दिया है। इसी घटनाक्रम के बाद भारत और इज़रायल के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता तेज़ हो गई है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसके बाद इज़रायली पीएमओ ने घोषणा की कि दोनों नेता जल्द ही आमने-सामने मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात दिल्ली ब्लास्ट के बाद पहली बार होगी और इसे आतंकवाद विरोधी रणनीति के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है।

📞 फोन वार्ता और मुलाकात की तैयारी

  • इज़रायली पीएमओ ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि बातचीत बेहद गर्मजोशी और दोस्ताना माहौल में हुई।
  • दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर ज़ोर दिया और जल्द ही मुलाकात करने पर सहमति जताई।
  • नेतन्याहू की भारत यात्रा लंबे समय से प्रतीक्षित है और अब इसे नए सिरे से प्राथमिकता दी जा रही है।

🌍 रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक सहयोग

भारत और इज़रायल के रिश्ते केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी भी लगातार मज़बूत हो रही है।

  • दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
  • हाल ही में इज़रायली वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोत्रिच की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर हुए।
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की इज़रायल यात्रा के दौरान FTA के लिए Terms of Reference (TOR) पर भी दस्तखत हुए।
  • इज़रायल ने उन अटकलों को खारिज किया कि दिल्ली ब्लास्ट के कारण नेतन्याहू की यात्रा टल सकती है। उन्होंने भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर “पूर्ण विश्वास” जताया।

⚔️ आतंकवाद पर संयुक्त रुख

  • भारत और इज़रायल दोनों ही आतंकवाद के पीड़ित देश हैं और इस मुद्दे पर उनका रुख बेहद सख्त है।
  • दोनों देशों ने बार-बार उन देशों की आलोचना की है जो आतंकवाद पर दोहरा रवैया अपनाते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया गया है।
  • संभावित मुलाकात में आतंकवाद से निपटने के लिए ठोस और संयुक्त रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

पाकिस्तान में बेचैनी

भारत और इज़रायल की बढ़ती नज़दीकी और आतंकवाद पर सख्त रुख पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है।

  • दोनों देशों की साझेदारी से पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है।
  • आतंकवाद पर संयुक्त कार्रवाई की संभावना से पाकिस्तान में राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल तेज़ होना तय है।