बिजनौर में गंगा की धारा पर नई पहल: अब नहीं सताएगा बाढ़ का डर, सिल्ट हटेगा, बनेगा 7 किलोमीटर लंबा चैनल
बिजनौर जिले में गंगा नदी के किनारे बसे गांवों के लिए राहत की खबर है। लंबे समय से बाढ़ के खतरे और तटबंध कटान की आशंका से जूझ रहे ग्रामीणों को अब एक नई परियोजना उम्मीद की किरण दिखा रही है। सिंचाई विभाग ने गंगा की धारा में जमा सिल्ट के टापुओं को हटाने और सात किलोमीटर लंबा चैनल बनाने की योजना तैयार की है। इस परियोजना का उद्देश्य है गंगा के प्रवाह को सुचारु करना, तटबंध को मजबूत करना और बाढ़ के खतरे को स्थायी रूप से कम करना।
सिल्ट के टापुओं से बिगड़ा प्रवाह
गंगा की धारा उत्तराखंड से बिजनौर में प्रवेश करती है। यहां मालन और सोनाली नदियां भी इसमें मिलती हैं। इन नदियों के साथ खेतों की कटान मिट्टी और सिल्ट गंगा में आकर जमा हो जाती है। समय के साथ यह सिल्ट नदी के बीच ऊंचे टापुओं का रूप ले लेती है। इन टापुओं ने गंगा के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर दिया है। पानी बीच धारा से हटकर तटबंध की ओर बहने लगा है। परिणामस्वरूप तटबंध पर दबाव बढ़ता है और तटीय गांवों में पानी भरने का खतरा बना रहता है।
चैनल निर्माण से मिलेगा समाधान
सिंचाई विभाग ने पहली बार गंगा की धारा में चैनल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। योजना के अनुसार रावली से बैराज तक लगभग सात किलोमीटर क्षेत्र में बड़ी मशीनों से सिल्ट हटाई जाएगी। हटाई गई सिल्ट को तटबंध की ओर डालकर उसे मजबूत किया जाएगा। साथ ही नदी की धारा को चार से पांच मीटर तक गहरा किया जाएगा। जब धारा के बीच कोई व्यवधान नहीं रहेगा तो पानी तेज़ी से आगे बढ़ेगा और तटबंध की ओर कटान नहीं करेगा। इससे गांवों की ओर बाढ़ का खतरा भी समाप्त होगा।
बैराज निर्माण के बाद से नहीं हुई सफाई
बिजनौर में चौधरी चरण सिंह मध्य गंगा बैराज का निर्माण वर्ष 1984 में हुआ था। तब से अब तक गंगा की धारा में सिल्ट की सफाई नहीं हुई। उत्तराखंड से आने वाली सिल्ट लगातार जमा होती रही और नदी का प्रवाह बाधित होता गया। परिणामस्वरूप गंगा की धारा पांच किलोमीटर से भी अधिक चौड़ी हो गई। यह चौड़ाई तटबंध और आसपास के गांवों के लिए खतरे का कारण बनी रही।
परियोजना से संभावित लाभ
- बाढ़ नियंत्रण: सिल्ट हटने और चैनल बनने से पानी का प्रवाह तेज़ होगा और गांवों में पानी भरने की आशंका कम होगी।
- तटबंध की मजबूती: हटाई गई सिल्ट को तटबंध पर डालने से उसकी मजबूती बढ़ेगी।
- कृषि भूमि की सुरक्षा: खेतों में पानी भरने और कटान की समस्या कम होगी।
- नदी का प्राकृतिक प्रवाह: गंगा को खुलकर बहने की जगह मिलेगी जिससे नदी का स्वरूप संतुलित रहेगा।
आगे की राह
सिंचाई विभाग ने इस परियोजना का प्रस्ताव भेज दिया है और जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है। यांत्रिकी खंड द्वारा गंगा की धारा में तटबंध निर्माण और चैनल बनाने का कार्य किया जाएगा। यदि यह योजना समय पर पूरी हो जाती है तो बिजनौर जिले के ग्रामीणों को हर साल बाढ़ के खतरे से जूझना नहीं पड़ेगा।
निष्कर्ष
गंगा नदी का प्रवाह और सिल्ट की समस्या लंबे समय से बिजनौर के लिए चुनौती रही है। सिल्ट के टापुओं ने नदी की दिशा बदल दी और तटबंध पर दबाव बढ़ा दिया। अब सात किलोमीटर लंबे चैनल के निर्माण से न केवल बाढ़ का खतरा कम होगा बल्कि गंगा का प्रवाह भी बेहतर होगा। यह परियोजना बिजनौर के ग्रामीणों के लिए सुरक्षा और राहत का नया अध्याय साबित हो सकती है।





