दीपावली को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया
दिवाली यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल, लाल किले पर होगा भव्य समारोह
भारत की सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से मनाई जाने वाली पर्व दिवाली को अब वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिल गई है। यूनेस्को (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) ने दिवाली को अपनी Intangible Cultural Heritage (ICH) List में शामिल कर लिया है। यह घोषणा भारत के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि दिवाली अब कुंभ मेला, दुर्गा पूजा और गरबा जैसे अन्य भारतीय परंपराओं के साथ अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त कर चुकी है।
लाल किले पर होगा ऐतिहासिक समारोह
10 दिसंबर को दिल्ली के लाल किले पर इस उपलब्धि का औपचारिक समारोह आयोजित किया जाएगा। लाल किला, जो भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, इस आयोजन का मुख्य स्थल होगा। यहाँ शाम को दीयों की जगमगाहट, पारंपरिक नृत्य और संगीत कार्यक्रमों के साथ एक भव्य उत्सव मनाया जाएगा। सरकारी इमारतों को सजाया जा रहा है और सार्वजनिक स्थानों पर दीये जलाए जाएंगे। यह आयोजन न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करेगा बल्कि दिवाली को वैश्विक मंच पर भारत की पहचान के रूप में स्थापित करेगा।
यूनेस्को की बैठक और भारत का प्रस्ताव
दिल्ली इन दिनों यूनेस्को की 20वीं अंतर-सरकारी समिति की बैठक की मेजबानी कर रही है। इस बैठक में दुनिया भर के प्रतिनिधि मौजूद हैं और भारत ने 2024 में दिवाली को नामांकित किया था। समिति ने इस प्रस्ताव पर विचार करते हुए दिवाली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने का निर्णय लिया। यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करता है और दुनिया को भारतीय परंपराओं की गहराई से परिचित कराता है।
दिल्ली सरकार का विशेष आयोजन
दिल्ली सरकार भी इस अवसर को खास बनाने के लिए दिल्ली हाट में अपना दिवाली समारोह आयोजित करेगी। दिल्ली के संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि शाम 5 बजे रेखा गुप्ता दिल्ली हाट में दीया जलाकर दिवाली मनाएंगी। यह आयोजन दिवाली को भारत की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के रूप में पेश करने और यूनेस्को सूची में शामिल कराने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत की अन्य सांस्कृतिक विरासतें
दिवाली के शामिल होने से भारत की सांस्कृतिक विरासत सूची और समृद्ध हो गई है। वर्तमान में भारत के पास यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में 15 परंपराएँ शामिल हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- कुंभ मेला
- कोलकाता की दुर्गा पूजा
- गुजरात का गरबा
- योग
- वैदिक मंत्रोच्चार
- रामलीला
अब दिवाली भी इस सूची का हिस्सा बन गई है, जिससे भारत की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर और बढ़ावा मिलेगा।
दिवाली का महत्व
दिवाली केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह पर्व प्रकाश और अंधकार के बीच संघर्ष का प्रतीक है, जहाँ दीयों की रोशनी आशा, सकारात्मकता और नई शुरुआत का संदेश देती है। दिवाली परिवारों को जोड़ती है, समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देती है और भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों को दर्शाती है।
वैश्विक पहचान और महत्व
यूनेस्को की सूची में शामिल होने का अर्थ है कि दिवाली अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता मिलेगी। इससे भारत की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी और दुनिया भर में भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान और रुचि बढ़ेगी।
निष्कर्ष
दिवाली का यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह न केवल भारतीय संस्कृति की समृद्धि को दर्शाता है बल्कि दुनिया को यह संदेश भी देता है कि भारत की परंपराएँ और उत्सव मानवता की साझा धरोहर हैं। लाल किले पर होने वाला समारोह इस उपलब्धि का प्रतीक होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।








