ज्योतिरादित्य सिंधिया: संचार साथी ऐप रखना या हटाना यूजर्स की मर्जी, संचार साथी ऐप वैकल्पिक, सरकार ने किया साफ ऐलान
📱 संचार साथी ऐप को लेकर पिछले कुछ दिनों से बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। खबरें थीं कि यह ऐप सभी नए मोबाइल फोनों में अनिवार्य रूप से इंस्टॉल किया जाएगा और यूजर्स इसे चाहकर भी डिलीट नहीं कर पाएंगे। इस पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया और इसे नागरिकों की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।
अब केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि यह ऐप पूरी तरह वैकल्पिक (optional) है। अगर कोई यूजर इसे नहीं चाहता, तो वह इसे अपने फोन से डिलीट कर सकता है।
सरकार का शुरुआती निर्देश
- 28 नवंबर को केंद्र सरकार ने मोबाइल कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे 90 दिनों के भीतर संचार साथी ऐप को सभी नए फोनों में इंस्टॉल करें।
- साथ ही यह भी कहा गया था कि यूजर्स इसे अनइंस्टॉल न कर सकें।
- इस आदेश के बाद विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक करार दिया और जनता की आज़ादी पर हमला बताया।
सरकार का नया रुख
- मंत्री सिंधिया ने स्पष्ट किया कि ऐप को इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं है।
- सरकार का उद्देश्य केवल यह है कि यह ऐप अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।
- इसे रखना या हटाना पूरी तरह यूजर की पसंद पर निर्भर है।
ऐप का उद्देश्य और फायदे
- फर्जी मोबाइल कनेक्शन की रिपोर्ट करना आसान बनाना।
- फोन चोरी या गुम होने की शिकायत दर्ज कराना।
- संदिग्ध IMEI नंबर की रिपोर्ट करना, जिससे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को मदद मिलती है।
- साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना।
मौजूदा डिवाइस और अनुपालन
- जो मोबाइल पहले से बाजार में हैं, उन पर यह ऐप सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए लागू किया जाएगा।
- सभी मोबाइल निर्माताओं और आयातकों को 120 दिनों के भीतर दूरसंचार विभाग को कंप्लायंस रिपोर्ट सौंपनी होगी।
सरकार ने साफ कर दिया है कि संचार साथी ऐप को लेकर किसी भी तरह की अनिवार्यता नहीं होगी। यह केवल एक सुरक्षा उपकरण है, जिसे जनता की सुविधा के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। यूजर्स चाहें तो इसे रख सकते हैं, और चाहें तो डिलीट कर सकते हैं।








