अयोध्या में आस्था का ऐतिहासिक पर्व, 25 नवंबर 2025 को होगा राम मंदिर पर ध्वजारोहण

अयोध्या की पावन नगरी एक बार फिर इतिहास रचने जा रही है। राम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद अब मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण का आयोजन किया जाएगा। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। ध्वजारोहण का अर्थ है कि मंदिर का निर्माण अब संपूर्ण रूप से संपन्न हो चुका है और भगवान श्रीराम के भक्त मंदिर के सभी हिस्सों के दर्शन कर सकेंगे।

ध्वजारोहण की तिथि और अवसर

राम मंदिर में भव्य ध्वजारोहण 25 नवंबर 2025 को किया जाएगा। यह दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन विवाह पंचमी का पावन पर्व भी मनाया जाता है। विवाह पंचमी वह तिथि है जब भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था। इस शुभ अवसर पर अयोध्या में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी और राम जन्मभूमि पर आस्था का परचम लहराएगा।

ध्वजारोहण के दिन विशेष व्यवस्थाओं के चलते मंदिर आम जनता के लिए दोपहर 2 बजकर 30 मिनट तक बंद रहेगा। इसके बाद श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे और इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बन पाएंगे।

ध्वजारोहण का शुभ समय

ध्वजारोहण का आयोजन अभिजीत मुहूर्त में किया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अभिजीत मुहूर्त को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। 25 नवंबर को यह मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:28 तक रहेगा। इसी समय भारत के प्रधानमंत्री एक बटन दबाकर राम मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराने की प्रक्रिया संपन्न करेंगे। इस क्षण को पूरे देश और विश्व के करोड़ों राम भक्त भावनाओं के साथ देखेंगे।

ध्वज का स्वरूप और प्रतीकात्मकता

राम मंदिर पर लहराने वाला ध्वज केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक अर्थों से जुड़ा हुआ है।

  • केसरिया रंग: यह रंग हिंदू धर्म में त्याग, बलिदान और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है।
  • सूर्य की आकृति: ध्वज पर अंकित सूर्य भगवान श्रीराम के सूर्यवंशी होने का प्रतीक है।
  • कोविदर वृक्ष: यह वृक्ष समृद्धि और जीवन ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
  • ॐ का चिन्ह: ॐ ब्रह्मांड की मूल ध्वनि है और यह ध्वज पर अंकित होकर दिव्य शक्ति का संचार करेगा।

ध्वज की लंबाई 22 फीट और चौड़ाई 11 फीट होगी। इसे इस प्रकार लगाया जाएगा कि यह 360 डिग्री में स्वतंत्र रूप से लहरा सके, जिससे दूर-दराज से आने वाले भक्त भी इसे देख सकें और आस्था से जुड़ सकें।

ध्वजारोहण का महत्व

हिंदू धर्म में ध्वजारोहण का अत्यंत महत्व है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और मंदिर की पूर्णता का प्रतीक है।

  • ध्वजारोहण दर्शाता है कि मंदिर का निर्माण कार्य अब संपूर्ण रूप से संपन्न हो चुका है।
  • मंदिर के शिखर पर फहराता ध्वज दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
  • यह भक्तों की भक्ति और आस्था का प्रतिनिधित्व करता है।
  • शिखर पर लहराता ध्वज मीलों दूर से ही भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।

ध्वजारोहण के बाद राम मंदिर का स्वरूप और भी भव्य हो जाएगा और यह अयोध्या की पहचान के रूप में विश्वभर में आस्था का केंद्र बनेगा।

अयोध्या का ऐतिहासिक क्षण

राम मंदिर ध्वजारोहण केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विश्व के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा। यह आयोजन दर्शाता है कि वर्षों की प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद अब राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर पूर्ण रूप से स्थापित हो चुका है। विवाह पंचमी के दिन ध्वजारोहण का आयोजन इस घटना को और भी पवित्र और अविस्मरणीय बना देगा।

राम मंदिर ध्वजारोहण का आयोजन 25 नवंबर 2025 को अभिजीत मुहूर्त में होगा। इस दिन अयोध्या में आस्था, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। मंदिर के शिखर पर लहराता केसरिया ध्वज न केवल निर्माण की पूर्णता का प्रतीक होगा, बल्कि यह करोड़ों भक्तों की आस्था और विश्वास का भी प्रतिनिधित्व करेगा। अयोध्या इस दिन एक बार फिर इतिहास रचेगी और राम जन्मभूमि पर आस्था का परचम पूरे विश्व में लहराएगा।