भारत की ऊर्जा नीति पर स्पष्टता: ट्रंप के दावे को विदेश मंत्रालय ने किया खारिज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के रूस से तेल आयात बंद करने के दावे पर भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने दोहराया कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित है, न कि किसी बाहरी दबाव पर।

🛢️ ट्रंप का दावा और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ

राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस से तेल खरीद “काफी हद तक” बंद कर दी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में संकेत दिया गया है कि भारत नवंबर के अंत से रूसी कच्चे तेल की सीधी खरीद में कटौती कर सकता है। यह संभावित कदम रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों पर 21 नवंबर से लागू होने वाले नए अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनज़र उठाया जा सकता है।

🗣️ विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा:

“हम पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित होती है। भारत की तेल खरीद राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से तय की जाती है, न कि किसी बाहरी दबाव के आधार पर।”

🔍 एस. जयशंकर की पूर्व टिप्पणी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पहले स्पष्ट किया था कि भारत का निर्णय उसकी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति पर आधारित है। उन्होंने पश्चिमी देशों द्वारा भारत के तेल व्यापार पर सवाल उठाने को “दोहरे मापदंडों” का उदाहरण बताया था।

💼 व्यापारिक विवाद और शुल्क नीति

ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जो पहले से लागू 25% जवाबी शुल्क के साथ मिलकर कुल 50% कर भार बन गया था। भारत ने इस कदम को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक” करार देते हुए कहा था कि उसकी ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों से संचालित होती है।