एक भारत, श्रेष्ठ भारत: सरदार पटेल को समर्पित भव्य आयोजन में शामिल हुए पीएम मोदी


सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर राष्ट्रीय एकता का भव्य उत्सव

सरदार वल्लभभाई पटेल, जिन्हें “लौह पुरुष” के नाम से जाना जाता है, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और देश के पहले उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री थे। उन्होंने 562 रियासतों का एकीकरण कर भारत को एक अखंड राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। उनके इसी योगदान को सम्मान देने के लिए भारत सरकार ने 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की, जिसकी शुरुआत वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।

🔹 150वीं जयंती का विशेष आयोजन

इस वर्ष सरदार पटेल की 150वीं जयंती को एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में मनाया गया। गुजरात के नर्मदा जिले के केवड़िया में स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी — जो कि दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा है — इस आयोजन का मुख्य केंद्र रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस अवसर पर केवड़िया पहुँचे और सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने देशवासियों को एकता, अखंडता और राष्ट्रीय समरसता के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।

🔹 एकता परेड का आयोजन

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के सामने एक भव्य एकता परेड का आयोजन किया गया, जिसमें देश के 16 राज्यों की पुलिस टुकड़ियाँ और पैरामिलिट्री बलों के जवानों ने भाग लिया। परेड में विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियाँ, पारंपरिक वेशभूषा और शौर्य प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

परेड का उद्देश्य भारत की विविधता में एकता को प्रदर्शित करना था। इसमें महिला पुलिस बल की भागीदारी भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिससे महिला सशक्तिकरण का संदेश भी प्रसारित हुआ।

🔹 “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की थीम

इस वर्ष के कार्यक्रम की थीम थी “एक भारत, श्रेष्ठ भारत”, जो देश की सांस्कृतिक विविधता में एकता को दर्शाती है। इस थीम के अंतर्गत देशभर के स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जैसे:

  • एकता दौड़ (Run for Unity)
  • निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएँ
  • भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ
  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और प्रदर्शनी

🔹 प्रधानमंत्री का संबोधन

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा:

“सरदार पटेल ने जिस भारत की कल्पना की थी, वह केवल भौगोलिक एकता नहीं थी, बल्कि भावनात्मक एकता भी थी। आज हम सबका कर्तव्य है कि हम उनके सपनों के भारत को साकार करें।”

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की एकता और अखंडता के लिए सदैव तत्पर रहें और देशहित को सर्वोपरि रखें।