गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे: बिजनौर, नजीबाबाद और धामपुर क्षेत्र की जमीन चयनित, बैनामा रोक और जमीन अधिग्रहण की तैयारी

गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रक्रिया जनपद में तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश सरकार ने ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड कारिडोर के रूप में इस परियोजना को प्राथमिकता दी है। पहले यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर से शामली तक प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसका विस्तार पानीपत तक करने का निर्णय लिया गया।

जमीन चयन की प्रक्रिया

  • जिन गांवों से होकर एक्सप्रेसवे गुजरेगा, वहां की जमीन के गाटा संख्या की सूची तैयार की जा रही है।
  • सूची तैयार होते ही संबंधित जमीन के बैनामों पर रोक लगा दी जाएगी।
  • इसके बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी।

वर्तमान स्थिति

  • अब तक करीब 50 गांवों की जमीन के गाटा संख्या की सूची एआईजी स्टांप कार्यालय भेजी जा चुकी है।
  • इस सूची का उद्देश्य बैनामा प्रक्रिया पर रोक लगाना है ताकि अधिग्रहण सुचारू रूप से हो सके।
  • बिजनौर, नजीबाबाद और धामपुर तहसील क्षेत्र के गांव इस सूची में शामिल हैं।
  • पहले सभी गांवों की जमीन पर बैनामों पर रोक लगाने की योजना थी।
  • लेकिन अधिक संख्या में गांव होने और राजस्व हानि की संभावना को देखते हुए निर्णय बदला गया।
  • अब केवल उन जमीनों की गाटा संख्या सूची तैयार की जा रही है जिनसे होकर एक्सप्रेसवे गुजरेगा।

आगे की योजना

  • उपनिबंधक कार्यालय को 50 गांवों की सूची उपलब्ध कराई जा चुकी है।
  • शीघ्र ही अन्य गांवों की सूची भी तैयार कर भेजी जाएगी।
  • इसके बाद आंकलन कर संबंधित तहसील के उपनिबंधक कार्यालय को सूची भेजी जाएगी और बैनामा प्रक्रिया पर रोक लगेगी।

गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे प्रदेश के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जमीन चयन और अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इस परियोजना से न केवल यातायात सुगम होगा बल्कि आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।