बिजनौर:- राजा भारतेंद्र मामले में भाजपा एकजुट, नेताओं ने की घटना की कड़ी निंदा, इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर सन्नाटा टूटा
बिजनौर जनपद के धामपुर क्षेत्र में हाल ही में घटी एक घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे नेताओं के बीच अब सन्नाटा टूटता नजर आ रहा है। जारी की गई एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूर्व सांसद राजा भारतेंद्र जी के साथ हुई घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और इस पूरे प्रकरण की कड़ी निंदा की है।
धामपुर विधायक अशोक कुमार राणा के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें नहटौर विधायक ओम कुमार, जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप, नगर पालिका चेयरमैन (झालू) लोकेन्द्र चौधरी, जिला उपाध्यक्ष अतुल मारवाड़ी, संजीव सेठी, ब्लॉक प्रमुख स्योहारा उज्जवल चौहान और ब्लॉक प्रमुख धामपुर क्षमा हेमलता चौहान सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। इस बैठक में सभी ने एक स्वर में घटना की निंदा करते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
बैठक के दौरान नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे पूर्व सांसद राजा भारतेंद्र जी के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं और इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। नेताओं का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं, बल्कि इससे क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
यह भी उल्लेख किया गया कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी शीघ्र ही प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी, ताकि मामले में उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। नेताओं ने आशा जताई कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद भाजपा के भीतर जो चुप्पी बनी हुई थी, वह अब धीरे-धीरे समाप्त हो रही है। स्थानीय स्तर पर नेताओं द्वारा एकजुट होकर सामने आना इस बात का संकेत है कि पार्टी इस मुद्दे को नजरअंदाज करने के बजाय गंभीरता से ले रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल धामपुर बल्कि पूरे बिजनौर जिले में चर्चा का विषय बना दिया है। आम जनता भी इस मामले में सच्चाई सामने आने और न्याय मिलने की उम्मीद कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और इसका राजनीतिक असर किस दिशा में जाता है।
फिलहाल, इतना स्पष्ट है कि इस घटना ने भाजपा के भीतर लंबे समय से चले आ रहे सन्नाटे को तोड़ दिया है और अब नेता खुलकर अपनी बात रखने लगे हैं।









