शेरकोट शहर इमाम दुआ करते समय क्यों रोने लगे?
- पिता को याद कर हुए भावुक, लोग की आंखों में भी छलके आंसू
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बिजनौर, चिंगारी
शेरकोट ईदगाह में नमाज़ पढ़ाने का पहला मौक़ा, गुज़रे पिता की याद और बस रोने लगे शहर इमाम।
ये पल काफी भावुक करने वाले थे। शेरकोट में ईद की नमाज़ के बाद दुआ हो रही थी। नमाज़ पहली बार लगभग 24 वर्षीय मुफ़्ती अमानुर्रब पढ़ा रहे थे। लोगों के लिए मग़फिरत की दुआओं का क्रम जारी था, लेकिन इसी बीच मुफ़्ती साहब कुछ ख़ामोश से हो गए। फफकते अंदाज़ में बोले, ‘मेरे अपनों के लिए भी दुआ कीजिये.’
यहां ये बताना ज़रूरी है कि मुफ़्ती अमानुर्रब के वालिद डॉक्टर रज़ा-उर-रब का इंतेक़ाल बीते 24 अप्रैल 2024 को हुआ था, बेटे से मुफ़्ते बने अमानुर्रब ने पहली बार ईदगाह में नमाज़ पढ़ाई थी, जिसको लेकर वे वालिद को याद कर रो पड़े। उनके साथ अन्य लोगों की आंखें आंसुओं से डबडबा गईं.
कौन हैं मुफ़्ती अमानुर्रब?
मुफ़्ती अमानुर्रब मज़ाहिरी शहर की मशहूर शख़्सियत डॉक्टर ज़का-उर्र-रब रब्बाब के पोते हैं। उनका घर शहर में मोर वाली कोठी के नाम से प्रसिद्ध है। कईं लोगों ने कहा कि उनकी आवाज़ काफी हद तक पूर्व शहर इमाम मरहूम रफीक़ अहमद क़ासमी की आवाज़ में मिलती जुलती है। लोगों ने उनको काफी पसंद किया। मुफ़्ती अमानुर्रब के चाचा अता-उर्र-रब ने बताया कि मुफ़्ती अमानुर्रब मौलवी भी हैं।









