कानपुर फर्जी डिग्री घोटाला: SIT की जांच में बड़ा खुलासा
कानपुर में चल रहे फर्जी डिग्री और मार्कशीट रैकेट की जांच में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने एक और बड़ा खुलासा किया है। जांच के दौरान तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों से जुड़ी कुल 287 डिग्रियां और मार्कशीट फर्जी पाई गईं। इनमें सबसे अधिक संख्या मणिपुर स्थित एशियन यूनिवर्सिटी की है, जहां से 284 डिग्रियां और मार्कशीट नकली साबित हुईं।
आधिकारिक रिकॉर्ड में नहीं मिली डिग्रियां
SIT ने बताया कि एशियन यूनिवर्सिटी की इन डिग्रियों का किसी भी आधिकारिक गजट या रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने SIT को दिए गए रोल नंबरों का मिलान करने पर पुष्टि की कि ये डिग्रियां कभी जारी ही नहीं की गई थीं। इसके अलावा, सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की 3 में से 2 डिग्रियां और अरुणाचल प्रदेश की हिमालयन यूनिवर्सिटी की 1 डिग्री भी फर्जी निकली।
CSJM यूनिवर्सिटी को सौंपे गए दस्तावेज
जांच के दौरान SIT ने छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी (CSJMU), कानपुर को 371 मार्कशीट, डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट सौंपे हैं। एडीसीपी साउथ योगेश कुमार, जो SIT की अगुवाई कर रहे हैं, ने बताया कि CSJMU प्रशासन ने इन दस्तावेजों का सत्यापन 2-3 दिनों में पूरा करने का आश्वासन दिया है।
कैसे शुरू हुआ मामला
यह मामला 18 फरवरी 2026 को सामने आया था, जब किदवई नगर पुलिस ने जूही गौशाला चौराहे पर स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय पर छापेमारी की थी। वहां से 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों और यूपी बोर्ड से जुड़ी 900 से अधिक फर्जी मार्कशीट, डिग्रियां और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद हुए थे। इनमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा और एलएलबी जैसे पाठ्यक्रमों की डिग्रियां शामिल थीं। पुलिस ने मौके पर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
2012 से सक्रिय गिरोह
जांच में सामने आया कि यह गिरोह 2012 से सक्रिय था और फर्जी दस्तावेज तैयार कर लाखों रुपये में बेच रहा था। गिरोह का मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा निकला, जो एमएससी (गणित) पास शिक्षक है। उसके साथ नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस को शैलेंद्र के बैंक खातों में पिछले चार वर्षों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन के सबूत मिले हैं।
बिना परीक्षा के डिग्री
SIT की जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह बिना परीक्षा दिलाए ही छात्रों को डिग्रियां उपलब्ध कराता था। फिलहाल फरार अन्य सदस्यों की तलाश में विभिन्न राज्यों में छापेमारी जारी है। SIT की टीमें कई विश्वविद्यालयों में जाकर रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह मामला शिक्षा व्यवस्था में गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। बिना परीक्षा दिए डिग्रियां उपलब्ध कराना न केवल छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि जांच और गहराई से की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का जल्द से जल्द पर्दाफाश हो सके और दोषियों को सजा मिले।






