ईरान-इजरायल संघर्ष में नया मोड़: IRGC प्रवक्ता अली मोहम्मद की मौत
मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने एक और गंभीर मोड़ ले लिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि संगठन के प्रवक्ता अली मोहम्मद इजरायली हमले में मारे गए हैं। ईरान ने उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब युद्ध अपने 21वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
इजरायल का जवाबी हमला
ईरान ने हाल ही में हाइफा शहर पर हमला किया था, जिसके बाद इजरायल ने करारा जवाब दिया। इजरायली मिसाइलों ने तेहरान को निशाना बनाया और शहर में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में बड़े विस्फोट दिखाई दे रहे हैं। इजरायल ने पहली बार कैस्पियन सागर में ईरान के नौसैनिक ठिकानों पर भी हमला किया है। इस हमले में मिसाइल जहाज और कमांड सेंटर तबाह कर दिए गए। यह इलाका रूस की सीमा के पास है, जिससे मॉस्को तक जाने वाली सप्लाई चेन पर भी असर पड़ सकता है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई
इजरायली हमलों के बीच ईरान ने भी अपनी आक्रामकता दिखाई। गुरुवार रात ईरान ने दुबई, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर स्ट्राइक की। दुबई सरकार ने हमलों की पुष्टि की है, जबकि बहरीन में एक गोदाम जलकर खाक हो गया। अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम खाड़ी देशों में इन हमलों को रोकने में सक्रिय है।
सैन्य ठिकानों पर हमले
तेहरान के परचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स और करमन में IRGC के ठिकानों पर भी बमबारी की खबरें हैं। ईरान ने इजरायली मिसाइलों को रोकने के लिए अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है, लेकिन लगातार हो रहे हमलों से राजधानी और अन्य सैन्य ठिकाने असुरक्षित हो गए हैं।
क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक असर
यह संघर्ष अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा। खाड़ी देशों पर ईरान के हमले से क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाएं सक्रिय रूप से रक्षा तंत्र में लगी हैं। वहीं, रूस की सीमा के पास हुए हमले से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है।
अली मोहम्मद की मौत ईरान के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है। IRGC की प्रवक्ता की भूमिका बेहद अहम मानी जाती थी, और उनकी मौत से संगठन की रणनीतिक संचार क्षमता प्रभावित हो सकती है। युद्ध के 21वें दिन हालात और भीषण होते जा रहे हैं, और यह संघर्ष अब पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए खतरा बन चुका है।






