इजरायल-अमेरिका का ईरान पर संयुक्त हमला: नेतन्याहू का पहला बयान और ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव

इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर एक संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसे “ऑपरेशन रोरिंग लायन” नाम दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों का कहना है कि यह हमला ईरान से आने वाले बड़े खतरे को रोकने के लिए किया गया है।

नेतन्याहू का पहला बयान

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक था। उन्होंने कहा:

  • “मेरे भाइयों और बहनों, इजरायल के नागरिकों, अभी एक घंटे पहले इजरायल और अमेरिका ने ईरान के आतंकवादी शासन से आने वाले बड़े खतरे को खत्म करने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया है।”
  • उन्होंने ईरानी जनता से अपील की कि वे इस्लामी शासन के खिलाफ उठ खड़े हों और अपना भाग्य खुद तय करें।
  • नेतन्याहू ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को “महान दोस्त” बताते हुए उनकी अगुवाई को ऐतिहासिक करार दिया।

ईरानी जनता से अपील

नेतन्याहू ने कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान के सभी वर्ग—फारसी, कुर्द, अजरबैजानी, बलोच और अहवाज़ी—अत्याचार की जंजीरों से मुक्त होकर एक स्वतंत्र और शांति चाहने वाला ईरान बनाएं। उन्होंने जोर दिया कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए क्योंकि यह पूरी मानवता के लिए खतरा होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी

हमले से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सेना को चेतावनी दी थी:

  • “हथियार डाल दो, तुम्हें पूरी छूट मिलेगी। अन्यथा निश्चित मौत का सामना करना पड़ेगा।”
  • ट्रंप ने कहा कि यह ऑपरेशन ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर केंद्रित है।
  • उन्होंने इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड और पुलिस बलों से तुरंत सरेंडर करने की अपील की।

ऑपरेशन का उद्देश्य

इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने कहा कि इस अभियान का मकसद ईरानी शासन को कमजोर करना और इजरायल पर मंडराते खतरों को खत्म करना है। दोनों देशों की सेनाओं ने इसे एक बड़े और संयुक्त ऑपरेशन के रूप में अंजाम दिया है।