दिल्ली शराब नीति मामला: केजरीवाल और सिसोदिया को मिली क्लीन चिट

दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे शराब नीति मामले में बड़ा मोड़ आया है। राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को दोषमुक्त करार दिया है। अदालत ने कहा कि सीबीआई की चार्जशीट में गंभीर खामियां थीं और प्रस्तुत सबूत किसी भी आपराधिक साजिश या भ्रष्टाचार को साबित नहीं कर पाए।

अदालत का फैसला

  • कोर्ट ने साफ कहा कि आबकारी नीति में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक इरादा नहीं था।
  • सीबीआई और ईडी की जांचों के बावजूद आरोपों को सबूतों से समर्थन नहीं मिला।
  • इस फैसले के बाद अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य 21 लोगों के खिलाफ दर्ज मामले को खारिज कर दिया।

फैसले के बाद भावुक दृश्य देखने को मिले। अरविंद केजरीवाल की आंखों में आंसू आ गए और मनीष सिसोदिया भी भावुक हो उठे।

घटनाक्रम की विस्तृत समयरेखा

  • अक्टूबर 2023: ईडी ने पहली बार केजरीवाल को समन जारी किया।
  • नवंबर–जनवरी 2024: उन्होंने कई समन को अनदेखा किया और इन्हें “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया।
  • मार्च 2024: नौ समन में पेश न होने के बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया।
  • मई 2024: सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए उन्हें अंतरिम जमानत दी।
  • जून 2024: तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया, बाद में नियमित जमानत मिली लेकिन ईडी की अपील पर रिहाई पर रोक लगी।
  • जून 2024: सीबीआई ने उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया।
  • सितंबर 2024: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी।
  • जनवरी 2026: दिल्ली की अदालत ने ईडी के दो मामलों में उन्हें बरी किया।
  • 27 फरवरी 2026: राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने अंतिम रूप से उन्हें क्लीन चिट दे दी।

राजनीतिक और कानूनी महत्व

यह मामला दिल्ली की राजनीति में सबसे विवादित मुद्दों में से एक रहा। विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया, जबकि आप ने इसे केंद्र सरकार की “राजनीतिक साजिश” करार दिया। अदालत के फैसले ने आप के नेताओं को बड़ी राहत दी है और पार्टी के लिए यह नैतिक जीत भी मानी जा रही है।

कानूनी दृष्टि से यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि केवल आरोपपत्र और समन पर्याप्त नहीं होते, बल्कि ठोस सबूतों की आवश्यकता होती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों को आरोप सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए।